economy

अर्थशास्त्र में यह माना जाता है कि सभी मनुष्य तार्किक होते हैं अर्थात् वे हानि की अपेक्षा लाभ पसन्द करते हैं तथा तार्किक रूप से स्व-हित के लिए प्रयासरत रहते हैं। राजनीति विज्ञान में अधिकाँशतः गलत रुप से यह माना जाता है कि राजनैतिक बाज़ार के सभी अभिनेता अर्थात् राजनेता एवं नौकरशाह, निस्वार्थ भाव से जनहित के लिए प्रयासरत रहते हैं।

देश के तमाम शहरों की सड़कें न सिर्फ लाखों कामगार गरीबों तथा अभावग्रस्त लोगों की आश्रयस्थली वरन उनकी रोजीरोटी का केंद्र भी हैं, जहां पर वे सस्ते और आकर्षक सामानों की दुकान सजाते हैं। शहरों में सड़क किनारे फुटपाथ पर आपकों ऐसे अनेक पुरष-महिलाएं पकाया हुआ भोजन, फल व सब्जियां, कपड़े, खिलौने, किताबें, घरेलू इस्तेमाल की चीजें व सजावटी सामान बेचते मिल जाएंगे। एक अनुमान के मुताबिक भारत में तकरीबन एक करोड़ लोग इस तरह सड़क किनारे सामान बेचते हुए अपनी आजीविका कमाते हैं।
 
स्वतंत्रता दिवस का अवसर थोड़ा रुकने, रोजमर्रा की घटनाओं पर सोच का दायरा बढ़ाने और पिछले 68 साल के दौरान अपने देश की यात्र पर नजर डालने का बढ़िया वक्त होता है। आजाद देश के रूप में अपने भ्रमपूर्ण इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूं तो कुहासे में मील के तीन पत्थरों को किसी तरह देख पाता हूं। अगस्त 1947 में हमने अपनी राजनीतिक लड़ाई जीती। जुलाई 1991 में आर्थिक आजादी हासिल की और मई 2014 में हमने सम्मान हासिल किया।
 
Author: 
गुरचरण दास