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चिराग तले अंधेरा देखना हो तो मेवात पधारिए। देश की राजधानी की नाक तले और गुड़गांव की अति आधुनिक इमारतों के बगल में स्थित मेवात का इलाका इंडिया और भारत के बीच खाई की जीती-जागती मिसाल है। देश के पहले शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद इसी मुस्लिम बाहुल्य इलाके से सांसद चुने गए थे।

बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के पास हो जाने के बाद उम्मीद बढ़ी थी कि देश में प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा के प्रबंध में भारी बदलाव आयेगा. 6 से 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के लिए बनाए गे इस कानून में बहुत कमियाँ हैं और इसको लागू करने की दिशा में ज़रूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति का  भी अभाव है. 1991 में जब मौजूदा प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने पी वी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में कम संभाला था, उसके बाद से ही शिक्षा को अति महत्वपूर्ण मुकाम पर रख दिया गया था. डॉ मनमोहन ने वित्त मंत्री के रूप में उदारीकरण और वैश्वीकरण की जिन नीतियों का सूत्रपात किया था उन्हें बाद में आने वाली सरकारें भी नहीं  रोक सकीं.

मनीष सभरवाल भारत की अग्रणी स्टाफिंग कम्पनी 'टीम लीस सर्विसेस' के चेयरमैन और स-संस्थापक हैं. कुछ ही साल पुरानी 'टीम लीस सर्विसेस' के आज भारत में 870 जगहों पर आफिस हैं जहां से वो अस्थायी और स्थायी नौकरियां लगवाने का काम करती है. अमरीका के मशहूर वार्टन स्कूल के पढे हुए श्री सभरवाल ग्यारवीं पंचवर्षीय योजना के लिए प्लानिंग कमीशन की लेबर व रोज़गार सम्बन्धी कमेटी के मेम्बर रह चुके हैं तथा प्रधान मंत्री की कौशल विकास काउन्सिल का भी हिस्सा हैं.

पेशे से भौतिक शास्त्री रहे विनोद रैना भारत में जन विज्ञान आन्दोलन के प्रणेता रहे हैं. इन्होने ऑल इंडिया पीपल साइंस नेटवर्क और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के जन्म में मदद की. वो पिछले दो दशको से एकलव्य नामक वैकल्पिक शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही एक NGO के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं. रैना केंद्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद के सदस्य हैं जिसने हाल में बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार एक्ट, 2009(शिक्षा का अधिकार एक्ट) की रचना की.

उत्तर प्रदेश में रहने वाली तेरह साल की बानो खान कहती हैं कि उनके जैसे बहुत सारे बच्चे हैं जो गरीब परिवारों से होने की वजह से काम पर जाते हैं, क्योंकि उनके घर के आसपास कोई अच्छे स्कूल नहीं होते हैं. "मेरे घर से सबसे पास का स्कूल 2.5 किलोमीटर दूर है, और मेरे घरवाले हर महीने 200 रूप्ए बस किराया नहीं दे सकते हैं." स्थानीय बच्चों के समूह की अध्यक्षा बानो खान का परिवार बदली इंडस्ट्रीय एरिया में सड़क किनारे एक चाय की दुकान चलाता है. बच्चों के लिए मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, में तीन किलोमीटर के भीतर एक उच्च प्राथमिक स्कूल खोले जाने का प्रावधान है.

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