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रायपुर. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की मदद से ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने की योजना फेल साबित हुई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले साल दाखिले की प्रक्रिया बदली थी। इसके तहत पहले सरकारी स्कूलों में फिर अनुदान प्राप्त व आखिर में प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिया जाना था।

राजधानी में यदि शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत स्कूलों को मान्यता देने की व्यवस्था लागू की गई तो नए सत्र में करीब 1400 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बंद हो जाएंगे। शिक्षा का अधिकार कानून के नियम 18 व 19 के अंतर्गत स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के नियमों का वर्णन है। इनमें छात्र शिक्षक अनुपात, कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या, खेल का मैदान आदि बातों का जिक्र है।

 

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निजी स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया से लेकर वहां ली जाने वाली फीस पर सूबे का सियासी पारा चढ़ सकता है। दिल्ली सरकार ने जहां इन दोनों मुद्दों पर निजी स्कूलों पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है, वहीं स्कूल प्रबंधक भी सरकार के ऐसे किसी भी कदम से निपटने के लिए लामबंद होना शुरू हो गए हैं। स्कूल प्रबंधक सरकार के किसी भी अंकुश के खिलाफ जहां सड़क पर उतर सकते हैं, वहीं इस मामले में वह न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
 
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स्कूली शिक्षा को लेकर हरियाणा सरकार के मन में सम्मान की भावना बिल्कुल नहीं है, और ना ही यह नई शिक्षा नीति को लेकर गंभीर है। निजी स्कूलों की फेडरेशन लगभग दो महीने से शिक्षा का अधिकार (आरटीई) व 134ए की गलत नीतियों के खिलाफ जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन और हड़ताल कर रही है किंतु राज्य सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ऐसा सुनने में आ रहा है कि नई शिक्षा नीति के बाबत विभिन्न राज्यों द्वारा प्राप्त अनुशंसाओं को लेकर आगामी 31 अक्टूबर को उत्तर भारतीय राज्यों की एक बैठक बुलाई गई है। किंतु हमें खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस नई शिक्षा नीति के बाब

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- प्राथमिक शिक्षा पर आधारित कॉफी टेबल बुक "बूंदें" का हुआ विमोचन

 - आरटी में निशुल्क शिक्षा का प्रावधान, लेकिन केंद्रीय विद्यालयों में ली जाती है फीसः कुलभूषण शर्मा

- आरटीई के कारण निजी स्कूलों पर तालाबंदी का मंडरा रहा खतराः डा. पार्थ जे शाह

 

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जा सकता है. ऐसे में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हालत इतनी खराब है कि जब वही बच्चे नौवीं कक्षा में पहुंचते हैं, तो उनमें से 50 फीसदी फेल हो जाते हैंः आजतक