आर्थिक आजादी

एक महत्वपूर्ण सवाल: क्या आर्थिक स्वतंत्रता से सचमुच लोगों के जीवन स्तर में कोई सुधार आता है? श्रीलंका में आर्थिक स्वतंत्रता ज्यादा है। यहां आर्थिक और सामाजिक माहौल भी अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में बेहतर है। फ्रेजर तालिका में आर्थिक मायने में ज्यादा मुक्त देशों और कम मुक्त देशों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में आश्चर्यजनक अंतर देखने को मिलता है।
 

वर्ष 2012 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सहकारिता के अंतराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इससे संबंधित सबसे बड़ा सम्मेलन कनाडा के क्यूबेक सिटी में हाल ही में 8 से 11 अक्टूबर के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विश्व स्तर पर विभिन्न तरह के सहकारी उपक्रमों के लगभग 100 करोड़ सदस्य हैं, जबकि लगभग 10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

आर्थिक आजादी और आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के बारे में युवाओं को जागरूक बनाने के लिए सेंटर फार सिविल सोसाइटी की ओर से 23 जनवरी से 10 फरवरी तक शैक्षणिक फेस्टीवल –फ्रीडम कारवां – का आयोजन किया गया है । दिल्ली और पुणे के कई कालेजों में होनेवाले इस फेस्टीवल में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान भारत के आमआदमी की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में पूंजीवाद और आर्थिक उदारवाद की भूमिका के बारे में अपने विचार प्रगट करेंगे और उनके सवालों के जवाब देंगे। इस सिलसिले में नुक्कड नाटकों और संगीत कार्यक्रमों और दृष्य कला प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है।