किसान

वर्ष 2012 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सहकारिता के अंतराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इससे संबंधित सबसे बड़ा सम्मेलन कनाडा के क्यूबेक सिटी में हाल ही में 8 से 11 अक्टूबर के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विश्व स्तर पर विभिन्न तरह के सहकारी उपक्रमों के लगभग 100 करोड़ सदस्य हैं, जबकि लगभग 10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

वर्ष 2013 की शुरूआत में जीएम फसलों के महत्व को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सार्वजनिक तौर पर अपने विचार देश के सामने रखे थे। कुछ उसी तरह वर्ष 2014 की शुरूआत भी एग्रीबायोटेक उद्योग के लिए खुशनुमा है। हमारे तमाम वैज्ञानिक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्पष्ट वक्तव्य से उत्साहित हैं। अनुवांशिक रूप से परिवर्तित जीएम फसलों के लिए एक सक्षम नीति के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हुए डॉ.

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी महंगाई की ही शिकायत कर रहा था। टीवी पर लोग आलू, प्याज, घी और दाल की कीमतें बताते नजर आते थे। हालांकि चुनावी पंडित हमेशा का चुनाव राग ही गा रहे थे, लेकिन कांग्रेस की हार में भ्रष्टाचार से ज्यादा महंगाई का हाथ रहा। हाल में महंगाई कुछ कम हुई हैं, लेकिन सभी दलों के लिए यह चेतावनी है कि आम आदमी महंगाई के दंश को भूलने वाला नहीं है और यह आगामी आम चुनाव में नजर आएगा।

Author: 
गुरचरण दास

पिछले छह वर्षों में खेत मजदूरों की मजदूरी काफी तेजी से बढ़ी है और इसके बढ़ने की रफ्तार चीजों की कीमतें बढ़ने की रफ्तार से ज्यादा रही है। इसका नतीजा ग्रामीण मजदूरों का जीवन स्तर सुधरने रूप में दिखाई पड़ा है। 2007-08 से लेकर अबतक देश के इस सर्वाधिक विपन्न तबके की आय में 6.8 प्रतिशत की वास्तविक सालाना बढ़त दर्ज की गई है। इस शानदार रुझान के पीछे क्या है?

बीटल्स का एक गीत है, 'कैंट बाय मी लव' (अपने लिए मैं प्यार तो नहीं खरीद सकता)। इसी तर्ज पर इस साल के बजट की थीम है, 'अपनी पार्टी के लिए मैं चुनाव तो नहीं खरीद सकता'। वित्तमंत्री आम तौर पर चुनाव से ठीक पहले वाले बजटों में सब्सिडी और कर्ज माफी के रूप में खुले हाथों रेवड़ियां बांटते हैं। ऐसे उपाय वोट दिलाने में ज्यादा कारगर नहीं होते, फिर भी वित्तमंत्री अपनी तरफ से उम्मीद नहीं छोड़ते। बहरहाल, वित्तमंत्री पलनियप्पन चिदंबरम ने अभी जो चुनावी बजट पेश किया है, उसमें उन्होंने मुफ्त का चंदन घिसने से भरसक परहेज किया है। वित्तीय मितव्यय को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वोट हासिल करने के

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

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