love

उस दौरान बड़ी गहमागहमी थी। देश में युद्ध छिड़ा हुआ था, सभी ने हथियार उठा लिये थे, हर किसी के सीने में देशप्रेम की ज्वाला धधक रही थी; नगाड़े बज रहे थे, बैंड बज रहे थे, खिलौना पिस्तौलें ठांय-ठांय कर रही थीं, पटाखे़ फुसफुसा रहे थे; हर एक हाथ में और छतों और बालकनियों की कतार में कई तरह के झंडे धूप में फड़फड़ा रहे थे; रोज़ाना उस चौड़ी सड़क पर नौजवान स्वयंसेवक अपने नए यूनिफॉर्म पहन कर इतराते हुए परेड करते थे, उनके मां-बाप, बहनें, प्रेमिकाएं गर्व के साथ भावनाओं से तर आवाज़ में उनका हौसला बढ़ाते थे; हर रात भीड़ भरी सभाएं होती थीं, जिनमें देशप्रेम से

बच्चा पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा है; तुम क्या करोगे? तुम तत्काल डर जाओगे--हो सकता है कि वह गिर जाए, हो सकता है वह अपना पैर तोड़ ले, या कुछ गलत हो जाए। और तुम्हारे भय से तुम भागते हो और बच्चे को रोक लेते हो। यदि तुमने जाना होता कि पेड़ पर चढ़ने में कितना आनंद आता है, तुमने बच्चे की मदद की होती ताकि बच्चा पेड़ पर चढ़ना सीख जाता! और यदि तुम डरते नहीं हो तो उसकी मदद करो, जाओ और उसे सिखाओ। तुम भी उसके साथ चढ़ो!

Category: