socialist society

कहने को तो हिंदूस्तान एक देश होने के नाते एक यूनिफाइड मार्केट है लेकिन किसानों के लिए सरकार जब चाहे तब एक नई लक्ष्मण रेखा खींच देती है। किसानों को अपनी ही फसल अपने मनपसंद ग्राहक को बेचने की आजादी नहीं रही है। देश के किसी अन्य प्रांत में तो क्या किसानों को अपना उगाया अनाज अपने तहसील या लोकल मंडी में भी प्राइवेट ट्रेडर्स को देने में कड़ी मनाहियां रहीं हैं। कुछ किलो अनाज को भी अपने साथ दूसरे राज्य में ले जाने पर स्मगलिंग जैसे संगीन मामले आरोपित कर किसानों को 30 दिन तक सलाखों के पीछे धकेला जाता रहा है। प्रस्तुत वीडियो डाक्यूमेंट्री में किसानों की आपबीती उन्हीं की जुबानी सुनें