ब्यूरोक्रेट्स

कितने आश्चर्य की बात है कि जो लोग सोचतें हैं कि वे डॉक्टर, अस्पताल और दवाईयों का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं, वे ही लोग ये सोचतें हैं कि वे डॉक्टर, अस्पताल, दवाईयां और इसकी देखरेख के लिए सरकारी अफसरशाही के खर्च को वहन कर सकते हैं..
- थॉमस सोवेल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से नौकरशाही को प्रोत्साहित करने की कोशिश की है, उससे हर कोई खुश नहीं है। इससे नाराज होने वालों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारी तो पहले ही मंत्रियों की बात नहीं सुनते, अब अगर नौकरशाह सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करेंगे, तो पूरी मंत्रिमंडलीय प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। प्रधानमंत्री जिन सांसदों पर भरोसा करके उन्हें मंत्रिमंडलीय टीम का हिस्सा बनाते हैं, उनका सशक्तीकरण भी जरूरी है। इसके विपरीत ब्यूरोक्रेसी अगर सीधा प्रधानमंत्री से बात करेगी, तो मंत्रियों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।