भ्रष्टाचार

सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। यह लोगों को कहीं का नहीं छोड़ता है और उन्हें उपक्रमण से वंचित करता है। यह लोगों को स्वावलंबी होने के गुणों का नाश करता है। जाहिर तौर पर, सरकार की बढ़ती शक्तियां मुझे भयभीत करती है। भले ही यह लोगों को शोषित होने से बचाकर यह अच्छा काम करती है, लेकिन व्यैक्तिकता (निजी), जो कि सभी उन्नतियों के हृदय में वास करती है, को नष्ट कर यह मानवता को भीषण हानि पहुंचाती है.. : महात्मा गांधी

दिल्ली में भाजपा की हार के बाद मोदी सरकार राजनीतिक साहस की कमी से जूझ रही है। इसलिए सरकार में यह साहस नहीं रहा कि वह मनरेगा जैसी नाकाम रोजगार योजनाओं को बंद कर सके। भाजपा को डर है कि अगर उसने इस तरह की योजनाओं को बंद किया तो उन्हें गरीब विरोधी करार दे दिया जाएगा।

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा जिस भी चीज के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई उस चीज में उतनी ही बढ़ोत्तरी हुई। सरकारों ने भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशा, आतंकवाद जिसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ा दुनिया में उक्त चीजों में कमी आने की बजाए वृद्धि ही हुई है। आशा है कि सरकार आने वाले समय में धन के खिलाफ युद्ध छेड़े ताकि देश में धन की मात्रा में वृद्धि हो..

यह जितना उत्साहजनक है कि अब सीबीआइ को भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नौकरशाहों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने के लिए सरकारी मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा वहीं यह उतना ही निराशाजनक कि इसे उचित ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को आगे आना पड़ा।