न्यायपालिका

कुछ कारण से आधिकारिक रूप से ऐसा माना जाता है कि भारतीयों को आमोद-प्रमोद से नफरत है। कोई आश्चर्य नहीं कि हमारे नेता अथवा अदालतें ऐसे आमोद-प्रमोद को खत्म करने संबंधी किसी फैसले पर एक पल भी नहीं सोचतीं। जब तक इरादा अच्छा हो तो हमें किसी भी मौज-मजे की चीज को कुचलने पर कोई आपत्ति नहीं होती। फिर चाहे उस फैसले से कुछ मूल्यवान हासिल न भी हो।

भारत में न्याय मिलने में विलंब के लिए कई प्रक्रियागत खामियां जिम्मेदार हैं। न्याय प्रक्रिया में सुधार के लिए कुछ कदम उठाए जाने चाहिए।