आलू

जैन पर्व पर्युषण को देखते हुए पिछले दिनों मांस खाने पर सरकार द्वारा लगाये गए प्रतिबन्ध को लेकर काफी विवाद हुआ। कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए। पर्युषण वैसे तो बीस दिन चलता है। फिर भी महारष्ट्र सरकार ने चार दिन तक जानवर वध और मीट की बिक्री पर बैन लगाया था। हालाँकि इस बैन में मछली बेचना और खाना बैन नहीं था क्योंकि सरकार की दलील थी कि मछली का वध नहीं किया जाता। वह पानी से निकालने पर खुद ब खुद मर जाती है। ये बैन महारष्ट्र से निकल, कुछ अन्य राज्यों में भी गया।  
 
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अभी बजट के गोपनीय दस्तावेजों की छपाई शुरू हुई, तो उससे ठीक पहले हलुआ बनाया गया। तस्वीर आई कि वित्त मंत्री कड़ाहे में अलट-पलट कर रहे हैं। आसपास कुछ सहयोगी खड़े हैं और मिठास के मारे मुस्करा रहे हैं।
 

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी महंगाई की ही शिकायत कर रहा था। टीवी पर लोग आलू, प्याज, घी और दाल की कीमतें बताते नजर आते थे। हालांकि चुनावी पंडित हमेशा का चुनाव राग ही गा रहे थे, लेकिन कांग्रेस की हार में भ्रष्टाचार से ज्यादा महंगाई का हाथ रहा। हाल में महंगाई कुछ कम हुई हैं, लेकिन सभी दलों के लिए यह चेतावनी है कि आम आदमी महंगाई के दंश को भूलने वाला नहीं है और यह आगामी आम चुनाव में नजर आएगा।

Author: 
गुरचरण दास

वैश्विक गांव में तब्दील हो चुकी दुनिया के तमाम देश जहां वस्तुओं, सेवाओं व खाद्यान्नों की विनिमय प्रक्रिया को अपनाकर देश को प्रगति व देशवासियों को समृद्धि की ओर अग्रसर करने में जुटे हैं वहीं, आश्चर्यजनक रूप से हमारे देश के कुछ राजनैतिक दलों और उनके समर्थकों का अब भी मानना है कि बाजार का नियमन कर कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। कम से कम पश्चिम बंगाल में आलू की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम तो यही साबित करते हैं। ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में आलू की लगातार बढ़ती कीमतों से निबटने के लिए कीमतों पर