सीबीएसई

दो दशक पूर्व लाइसेंस, परमिट, कोटा आधारित प्रशासनिक व्यवस्था के दौर में जब अधिकांश सेवा प्रदाता कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र की यानि सरकारी हुआ करती थीं तब उपभोक्ताओं के लिए उन सेवाओं को हासिल करना टेढ़ी खीर हुआ करती थीं। बात चाहे हवाई जहाज की यात्रा करने की हो या टेलीफोन कनेक्शन लेने की, ऐसी सेवाएं लग्जरी की श्रेणी में शामिल हुआ करतीं थीं और स्टेटस सिंबल के तौर पर जानी जाती थीं और मध्यवर्ग के लिए ऐसा कर पाना किसी बड़े सपने के पूरा होने से कम नहीं हुआ करता था। इसके अलावा सेवा की गुणवत्ता की बात करना तो जैसे दूसरी दुनियां की बात थी। लेकिन आज परि

अभी हाल ही में मैंने भारतीय हॉकी महासंघ के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला है। मैं हॉकी की आन बान शान और पुरातन गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत हूं। हालांकि हॉकी की वर्तमान स्थिति को अलग करके मापा नहीं जा सकता, यह  मुद्दा अपने आप में काफी संवेदनशील है। भारत में खेलों को लेकर जबरदस्त उत्साह और संभावनाएं हैं, इसको परिपक्व करने की जिम्मेदारी हमारी है, ताकि विश्व खेल मंचों पर भारत के खिलाडी अपनी बेहतरीन प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। आज जरुरत है कि हम दुनिया के दूसरे देशों की तरफ भी देखें। और खेल जगत में हो रहे बदलावों को