Admission

राजधानी दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के हवाले से मीडिया में प्रकाशित खबरों के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2017-18 में ईडब्लूएस कैटेगरी के तहत नर्सरी कक्षाओं दाखिलों के लिए कुल 1,13,991 आवेदन प्राप्त हुए। बीते दिनों निदेशालय द्वारा लॉटरी/ ड्रॉ प्रक्रिया के बाद कुल उपलब्ध 31,653 सीटों के लिए पहली सूची जारी की गयी। निजी स्कूलों में दाखिले की इच्छा रखने वाले 82,338 छात्रों के अभिभावकों के लिए उहापोह की स्थिति बनी हुई है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उनके बच्चों को दाखिला कैसे मिलेगा।

एक तरफ़ सरकार ने छात्रों में तनाव कम करने के लिए 10 वीं में ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया है, दूसरी ओर अच्छे कॉलेजों में दाखिले के लिए 12 वीं के अंकों को आधार बनाया जा रहा है. क्या इस व्यवस्था से छात्रों में तनाव कम होगा?

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स ने प्रवेश के लिए जो पहली कट ऑफ़ लिस्ट जारी की है, उसमें गैर कॉमर्स छात्रों के लिए किसी एक विषय में 100 फ़ीसदी अंक तय किये गये हैं. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इसे अव्यावहारिक बताकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं. लेकिन डीयू में दाखिले की इस प्रक्रिया ने देश की शिक्षा व्यवस्था की कई खामियों को उजागर कर दिया है. सन 1987 में जब मैंने इसी श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स में दाखिला लिया था तो उस साल 10 लाख बच्चे 12 वीं की परीक्षाओं में बैठे थे और एसआरसीसी में 800 सीटें थीं. 2011 में करीब 1.1 करोड़ बच्चे 12 वीं की परीक्षाओं में शामिल हुए हैं, पर वहां सीटों की संख्या उतनी ही है. जब देश में युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है तो सीटों की संख्या क्यों नहीं बढ़ायी गयी?