Protest

प्राइवेट स्कूल प्रत्येक वर्ष फीस में कुछ न कुछ बढ़ोतरी अवश्य करते हैं। बच्चों को मिलने वाली गुणवत्ता युक्त शिक्षा के ऐवज में आमतौर पर अभिभावकों यह स्वीकार्य भी होता है। हालांकि, हाल फिलहाल में अलग अलग मदों में होने वाली फीस वृद्धि को अनापेक्षित व अनावश्यक बताते हुए अभिभावकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। वे अब सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे हैं।

- प्राइवेट अनएडेड स्कूलों ने सरकार पर लगाए सरकारी और निजी स्कूलों में भेदभाव करने का आरोप
- आरटीई की खामियों के कारण बंदी की मार झेल रहे देशभर के स्कूलों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन
- प्रधानमंत्री मोदी से पांच लाख अध्यापकों के रोजगार व 3 करोड़ छात्रों के भविष्य को बचाने की गुहार

शांतिपूर्वक तरीके से चल रहे आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों और रैलियों को कुचल देने की परंपराएं इतिहास के कई पन्नों मंआ दर्ज हैं। दरअसल किसी भी लोकतांत्रिक सरकार और हुकूमत के पास विद्रोह को बर्दाश्त करने की क्षमता नहीं होती। यहीं वजह है कि अपने खिलाफ उठ रही आवाजों को तमाम सरकारें दबा देती हैं। भ्रष्टाचार और काले धन पर शांतिपूर्वक चल रहे  बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के सत्याग्रह के साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया गया।

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