Baba Ramdev

चार जून की रात दिल्ली के रामलीला मैदान में की गई पुलिस ज्यादतियों का विरोध करने वाले तमाम धर्माचार्य, योगाचार्य, संन्यासी और स्वयंसेवी संगठन अगर आने वाले समय में एक मंच पर एकत्र होकर अन्ना हजारे और बाबा रामदेव की मांगों का समर्थन करने का तय कर लें और गांव-गांव और शहरों में फैले अपने करोड़ों समर्थकों से सरकार का विरोध करने का आह्वान कर दें तो कैसी परिस्थितियां बनेंगी?

शांतिपूर्वक तरीके से चल रहे आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों और रैलियों को कुचल देने की परंपराएं इतिहास के कई पन्नों मंआ दर्ज हैं। दरअसल किसी भी लोकतांत्रिक सरकार और हुकूमत के पास विद्रोह को बर्दाश्त करने की क्षमता नहीं होती। यहीं वजह है कि अपने खिलाफ उठ रही आवाजों को तमाम सरकारें दबा देती हैं। भ्रष्टाचार और काले धन पर शांतिपूर्वक चल रहे  बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के सत्याग्रह के साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया गया।

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