समानता

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य सुशासन के लिए काम करना होता है। वह सुशासन जो प्रमुख रूप से आठ अव्यवों से मिलकर
तैयार होता है। ये अव्यव हैंः
विधि का शासन अर्थात rule of law
समानता एवं समावेशन अर्थात equity and inclusiveness
भागीदारी अर्थात participation
अनुक्रियता अर्थात responsiveness
बहुमत या मतैक्यता अर्थात consensus oriented
प्रभावशीलता व दक्षता अर्थात effectiveness and efficiency
पारदर्शिता अर्थात transparency

समाजवाद के 6 चमत्कार
 
1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
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ऑस्ट्रियन-ब्रिटिश अर्थशास्त्री फ्रेडरिक आगस्टस हायक (1899-1992) ने क्या खूब कहा है, कि समानता के लिए कार्य करना और समान व्यवहार करना दोनों बिल्कुल अलग अलग चीजे हैं। उनका मानना था कि यदि समाज में वास्तव में समानता लानी है तो आपको उसके लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने की जरूरत नहीं है। आपको बस करना ये है कि आगे से सबके साथ समान व्यवहार करना शुरू कर दें।

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