Gas

"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप टमाटर की कमी पैदा करना चाहते हैं तो सिर्फ एक ऐसा कानून बना दीजिए जिसके तहत कोई भी खुदरा व्यापारी टमाटर की कीमत 20 रूपए प्रति किलो की दर से अधिक नहीं वसूल सकेगा। तत्काल ही टमाटर की कमी पैदा हो जाएगा। ठीक ऐसी ही स्थिति तेल और गैस के साथ है।"
- मिल्टन फ्रीडमैन

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भारत की ऊर्जा समस्या बड़ा आकार लेने वाली है। कोयला, प्राकृतिक गैस और तेल के बड़े उत्पादकों ने हाल ही में कहा कि अगले कुछ सालों में उनके उत्पादन में बहुत कम वृद्धि होगी। जब देश में ईंधन की मांग बढ़ती जा रही है, तब देश के लिए यह बुरी ख़बर है।

इसका मतलब यह हुआ कि और अधिक ईंधन का आयात किया जाएगा और ऊर्जा कंपनियों के आयात खर्च और अधिक बढ़ते जाएंगे। इसका मतलब यह भी हुआ कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र तेज़ी से असुरक्षित होता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया की बाढ़ और मध्य-पूर्व के देशों में फैल रही अशांति जैसी घटनाओं से विश्व आपूर्ति में आयी बाधाओं और अस्थिर कीमतों के कारण यह कमज़ोरी आ रही है।

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