उद्यमशीलता

...जोनाथन को पैदल चलते कई घंटे हो चुके थे लेकिन दूर-दूर तक ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा था जिससे पता चल सके कि आसपास किसी तरह का जीवन भी है। अचानक पास की झाड़ी में कुछ हिलने की आहट हुई। पीली धारीदार पूंछवाला एक छोटा सा जानवर झाड़ियों के बीच मुश्किल से नजर आ रह रास्ते से नीचे की ओर भागा। शायद एक बिल्ली थी। जोनाथन ने सोचा, क्या पता यही मुझे किसी बस्ती तक पहुंचा दे। जोनाथन ने घनी झाड़ियों के बीच कूद लगा दी।

 

विश्व को भारत में संभावनाएं दिखाई दे रही है। वो हमारे देश को बाजार की तरह देखते हैं। उन्हें यहां 1 अरब से अधिक खरीददार दिखाई देते हैं। जहां वे अपने उत्पादों को बेच सकते हैं। हमारी मानवीय संपदा विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र है। यही कारण है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां हमारे देश में व्यवसाय के लिए आ रही है। उन्हें, यहां बेहतर आर्थिक भविष्य की संभावनाएं दिखती हैं। जबकि हम सवा सौ करोड़ लोग पूरी दुनिया के लिए उत्पादन करने में सक्षम हैं। आगे आने वाले समय में भारत को बाजार नहीं, उत्पादक देश बनना है। इसके लिए हमें अपने युवा शक्ति में भरपूर संभावनाएं दिखत

बीते 15 जुलाई को आयरिश रॉक स्टार व अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता बोनो को फ्रेंच गणराज्य के ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स का कमान्डर बनाया गया। अब शायद वे ही फ्रेंच पार्लियामेंट को “साउंड इकोनॉमिक्स” सिखा सकें। यहां कि पार्लियामेंट लाभ कमाने वाली कम्पनियों को फैक्ट्रियों को बंद करने से रोकने के लिए एक और सोशलिस्ट कानून लाने के बाबत विचार कर रही है।

बोनो? क्या ये वही नहीं हैं जो आर्थिक विकास की समस्याओं के लिए सरकारी समाधान की वकालत के लिए ज्यादा जाने जाते हैं?