Terrorism

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा जिस भी चीज के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई उस चीज में उतनी ही बढ़ोत्तरी हुई। सरकारों ने भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशा, आतंकवाद जिसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ा दुनिया में उक्त चीजों में कमी आने की बजाए वृद्धि ही हुई है। आशा है कि सरकार आने वाले समय में धन के खिलाफ युद्ध छेड़े ताकि देश में धन की मात्रा में वृद्धि हो..

वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमलों को रोकने में हमारी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी 2009 के आम चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गई थी। आम चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि ‘हम देश के हर नागरिक को अधिकतम सुरक्षा की गारंटी देते हैं। हम आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, फिर उसका स्रोत चाहे कोई भी हो।’ घोषणा पत्र में यह भी कहा गया था कि ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पुलिस सुधारों की जरूरत को समझती और स्वीकार करती है। इसके लिए राजनीतिक एक्जीक्यूटिव और पुलिस प्रशासन के बीच स्पष्ट अंतर किया जाएगा। हाउसिंग और शैक्षिक सुविधाओं के मामले में पुलिस बल के लिए अधिक बेहतर प्रबंधन किया जाएगा। पुलिस बल की विश्वसनीयता को एक संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा।’

कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन अंततः मार डाला गया. आतंक की एक इबारत का समापन हुआ लेकिन तमाम संदेह और कयास अभी भी विद्यमान हैं. दुनियां थोड़ी चकित जरूर है लेकिन कहीं एक राहत की आस भी दिख रही है. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि यदि अमेरिका पूरी दुनियां में कहीं भी छुपे हुए अपने दुश्मनों को ढूंढ़ कर मार सकता है और अपनी धमक कायम कर सकता है तो भारत अपने निर्दोष नागरिकों की हत्याएं चुपचाप क्यों देखता फिर रहा है. पाकिस्तान ने ना जाने कितने भारतीयों को अपनी कायराना हरकतों से मौत की नींद सुला दिया और भारत ने बस केवल वार्ता की बात तक बात सीमित रखी. 1947 से लेकर आज तक पाक के मंसूबों में कोई बदलाव नहीं आया और वह लगातार अपनी निंदित हरकतों को अंजाम देता रहा.

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यदि आतंकवाद का सहारा लेने वाले साधु-संतों का तर्क यह है कि उनका आतंकवाद सिर्फ जवाबी आतंकवाद है, तो मैं कहूंगा कि यह तर्क बहुत बोदा है। आप जवाब किसे दे रहे हैं? बेकसूर मुसलमानों को? आपको जवाब देना है तो उन कसूरवार मुसलमान आतंकवादियों को दीजिए, जो बेकसूर हिंदुओं को मारने पर आमादा हैं। आतंकवाद कोई करे, किधर से भी करे, मरने वाले सब लोग बेकसूर होते हैं।