शिक्षा का अधिकार कानून

प्राइवेट स्कूल प्रत्येक वर्ष फीस में कुछ न कुछ बढ़ोतरी अवश्य करते हैं। बच्चों को मिलने वाली गुणवत्ता युक्त शिक्षा के ऐवज में आमतौर पर अभिभावकों यह स्वीकार्य भी होता है। हालांकि, हाल फिलहाल में अलग अलग मदों में होने वाली फीस वृद्धि को अनापेक्षित व अनावश्यक बताते हुए अभिभावकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। वे अब सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे हैं।

राजधानी में यदि शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत स्कूलों को मान्यता देने की व्यवस्था लागू की गई तो नए सत्र में करीब 1400 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बंद हो जाएंगे। शिक्षा का अधिकार कानून के नियम 18 व 19 के अंतर्गत स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के नियमों का वर्णन है। इनमें छात्र शिक्षक अनुपात, कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या, खेल का मैदान आदि बातों का जिक्र है।

 

Category: 

 

गैर सरकारी संस्था क्राई (चाइल्ड राइट्स ऐंड यू) की ओर से हाल ही में जारी रिपोर्ट ने बहुचर्चित शिक्षा के अधिकार (आरटीई) की कमियों की ओर एक बार फिर से ध्यान आकर्षित किया है। कुछ महीने पहले एक अन्य एनजीओ ‘प्रथम’ ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आरटीई को लागू किये जाने के बाद शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। इसके लिए आमतौर पर दोषी ठहराए जाने वाले कारकों, जैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, लालफीताशाही, भ्रष्टाचार आदि को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। कमियां इस कानून के भीतर ही हैं।