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नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक वेदप्रताप वैदिक ने आज़ादी.मी के बारे में अपने विचार रखेउन्होने कहा की देश को वास्तव में सच्ची आज़ादी अभी मिली नहीं है. देश में 80 करोड़ लोग सिर्फ 20 रूपये रोज़ पर गुज़र करते हैं और शिक्षा, पोषण, घर सम्बन्धी कई दिक्कतों का सामना करते हैं. इन सभी दिक्कतों  से निजात पाना ही आज़ादी है.

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आज़ादी.मी के बारे में बोलते हुए वरिष्ठ स्तंभकार और लेखक स्वामीनाथन अय्यर ने कहा की भारत को अंग्रेज़ शासकों से आज़ादी तो बहुत पहले मिल गयी पर आज भी हमारे हाथ और कई मामलों में बंधे हुए हैं. आज भी बिना घूस दिए कितने ही काम पूरे नहीं हो सकते. जिस दिन हम इन बंधनों से आजाद हो जायेंगे, वहीँ जीत होगी.

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मशहूर लेखक गुरचरण दास यहाँ कह रहे हैं कि 1947 में हमें सिर्फ वोट देने की और नेता चुनने की आज़ादी मिली पर सन 1991 में ही हमें आर्थिक आज़ादी मिल पायी. इस बीच 40 सालों में हमें सरकार ने लाइसेंस राज में गिरफ्तार कर के रखा.

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आजादी के आंदोलन के दौरान हमारे नेताओं ने भारत की गरीबी के लिए औपनिवेशिक शोषण को खूब कोसा था। ब्रिटिश लोगों के आने से पहले भारत की गिनती दुनिया की शीर्ष उद्योग और कारोबारी महाशक्तियों में की जाती थी। जब ब्रिटिश गए तो भारत गरीब होकर, तुलनात्मक रूप से और भी पिछड़ गया था। भारतीयों ने इसका दोष ब्रिटेन के माथे मढ़ दिया था और इस बात को लेकर वे आश्वस्त थे कि औपनिवेशिक सत्ता खत्म होने के बाद भारत फिर अमीर बन जाएगा।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

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