अन्य

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य सुशासन के लिए काम करना होता है। वह सुशासन जो प्रमुख रूप से आठ अव्यवों से मिलकर
तैयार होता है। ये अव्यव हैंः
विधि का शासन अर्थात rule of law
समानता एवं समावेशन अर्थात equity and inclusiveness
भागीदारी अर्थात participation
अनुक्रियता अर्थात responsiveness
बहुमत या मतैक्यता अर्थात consensus oriented
प्रभावशीलता व दक्षता अर्थात effectiveness and efficiency
पारदर्शिता अर्थात transparency

रिलायंस ने 1 सितंबर 2016 को अपनी दूरभाष सेवा ‘जियो’ का लोकार्पण किया। इसके तहत फोन पर निशुल्क बातचीत करने और ग्राहको के लिए 4 जी इंटरनेट डेटा प्लान उपलब्ध है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक रिलायंस जियो का सिम हासिल करने के लिए पूरा देश उमड़ पड़ा और कतारबद्ध होकर खड़ा हो गया।

अध्यापकों की शैक्षणिक योग्यता और वेतन

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून 2009 में शिक्षक होने के लिए बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की योग्यता को अनिवार्य बना दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पहले से ही अध्यापनरत समस्त अध्यापकों के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उतीर्ण करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकारों ने भी उक्त नियमों में रियायत नहीं दी और सभी निजी स्कूलों के अध्यापकों के लिए पांच वर्ष के भीतर टीईटी उतीर्ण करना आवश्यक कर दिया।

खुशखबरी!! ipolicy वर्कशॉप में आवेदन करने से चुक गए पत्रकारों के लिए सुनहरा मौका। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2017 से बढ़ाकर 5 जून 2017 कर दी गई है। जल्दी करें आवेदन का यह अंतिम मौका हाथ से निकल न जाए.. अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें http://azadi.me/ipolicy-for-journalists-naukuchiatal पूर्व में आयोजित ipolicy वर्कशॉप से संबंधित तस्वीरों को देखने के लिए क्लिक करें... https://www.facebook.com/pg/www.azadi.me/photos/?tab=albums
Category: 

भारत में, सरकार 6 से 14 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है। हमारे देश में शिक्षा नीति की संरचना इस प्रकार की गई है कि वह शिक्षा मयस्सर कराने के लिए मुख्य रूप से सरकार द्वारा संचालित किए जाने वाले स्कूलों पर केंद्रीत है। यकीनन, गैर सरकारी संस्थानों द्वारा संचालित स्कूलों को दोयम स्तर का दर्जा हासिल है। इसलिए, हमें अपने पर्यवेक्षण के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों के प्रति नीतिगत दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। सरकारी स्कूलों के संबंद्ध में यह दृष्टिकोण जहां सहयोगी और सुविधा प्रदान करन

गरीबी को खत्म करने के अभी तक सुने गए प्रस्तावों में सबसे आसान एक एनजीओ में काम करने वाले एक दोस्त की ओर से आया। क्यों न हम न्यूनतम वेतन को इतना बढ़ा दें कि सभी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ जाएं? यह कितना आसान लगता है मनोहारी और दर्दरहित। अफसोस, यह नाकाम रहेगा क्योंकि हमारे यहां एक ऐसा कानून है जिसका परिणाम अनपेक्षित है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

दो दशक पूर्व लाइसेंस, परमिट, कोटा आधारित प्रशासनिक व्यवस्था के दौर में जब अधिकांश सेवा प्रदाता कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र की यानि सरकारी हुआ करती थीं तब उपभोक्ताओं के लिए उन सेवाओं को हासिल करना टेढ़ी खीर हुआ करती थीं। बात चाहे हवाई जहाज की यात्रा करने की हो या टेलीफोन कनेक्शन लेने की, ऐसी सेवाएं लग्जरी की श्रेणी में शामिल हुआ करतीं थीं और स्टेटस सिंबल के तौर पर जानी जाती थीं और मध्यवर्ग के लिए ऐसा कर पाना किसी बड़े सपने के पूरा होने से कम नहीं हुआ करता था। इसके अलावा सेवा की गुणवत्ता की बात करना तो जैसे दूसरी दुनियां की बात थी। लेकिन आज परि

सिंगापुर में सात वर्ष तक प्रवास करने और प्रॉक्टर एंड गैम्बल लिमिटेड में काम करने के बाद दस साल पहले सन् 2007 में मैं भारत लौट आया। भारत में शिक्षा की तस्वीर बदलने की इच्छा मुझमें बलवती हो रही थी क्योंकि हमारे बच्चों को यहां मिलने वाली शिक्षा की खराब गुणवत्ता से मैं बेहद असंतुष्ट था। शिक्षा के प्रारूप को समझने के लिए मैनें भारत की गिनी चुनी लिस्टेड एजुकेशन कंपनियों में से एक – ज़ी लर्न लिमिटेड के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर पांच वर्ष तक जुड़ा रहा। इससे मुझे शिक्षा के स्कूल और प्री स्कूल वाले प्रारूप के बारे में विस्तृत समझ प्राप्त कर

Pages