व्यापार

    'उद्यमी' शब्द सुनते ही अचानक टाटा, बिरला, अंबानी, नारायण मूर्ति आदि का स्मरण हो आता है। लेकिन एक सामान्य आदमी भी किसी-न-किसी रूप में कोई-न-कोई उद्यम करता है। महावत, लोहार, रेहड़ी-पटरी वाले, मदारी, सपेरे, मछुआरे, चिड़ीमार, मजदूर, कूड़ा चुनने वाले इत्यादि कड़ी मेहनत कर अपनी जीविका चलाते हैं। तो क्या वे भी उद्यमी नहीं हुए? यह अलग बात है कि कानून, रेगुलेशन और रीति-रिवाज बहुधा उनके सामने कई बाधाएँ खड़ी करती रहती हैं।

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