वित्तमंत्री

एक राज्य का नया वित्तमंत्री काकभुशुण्डजी से मिलने गया और हाथ जोड़कर बोला कि मुझे शीघ्र ही बजट प्रस्तुत करना है, मुझे मार्गदर्शन दीजिए. तिस पर काकभुशुण्ड ने जो कहा सो निम्नलिखित है:

यह अच्छा है कि वर्तमान मोदी सरकार विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अपने पूर्ववर्ती सरकारों की भांति भावुकता की बजाए व्यावहारिकता के आधार पर फैसले लेती दिख रही है। वित्तमंत्री अरुण जेटली के राज्यसभा में दिया गया वह बयान जिसमें कि उन्होंने घाटे में चल रही 79 सार्वजनिक इकाईयों को निजी करने के विकल्प को खुला रखने की बात कही थी, इसका ज्वलंत प्रमाण है। स्थिति की गंभीरता को और अधिक स्पष्ट करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि यदि सिर्फ उक्त 79 इकाईयों में लगे निवेश की धनराशि को ही वसूल लिया जाए तो देश के प्रत्येक नागरिक को 1,30,000 रुपए प्राप्त हो सकते

अभी बजट के गोपनीय दस्तावेजों की छपाई शुरू हुई, तो उससे ठीक पहले हलुआ बनाया गया। तस्वीर आई कि वित्त मंत्री कड़ाहे में अलट-पलट कर रहे हैं। आसपास कुछ सहयोगी खड़े हैं और मिठास के मारे मुस्करा रहे हैं।
 

पी चिदंबरम साहब से एक सवाल पूछने का मौका मिलता मुझे, तो मेरा उनसे यह सवाल होता- भारत का कारवां क्यों लुटा? यह सवाल मैंने चुराया है एक मशहूर शेर से, जो कुछ इस तरह है, तू इधर-उधर की न बात कर, यह बता कारवां क्यों लुटा? वित्त मंत्री के लिए यह इसलिए मुनासिब है, क्योंकि वह उस सरकार में मंत्री हैं, जिसके शासनकाल में इतना नुकसान पहुंचाया गया है इस गरीब देश की अर्थव्यवस्था को कि जीडीपी (वार्षिक वृद्धि दर), जो कुछ वर्ष पहले दौड़ रही थी नौ फीसदी की रफ्तार से, पिछले वर्ष गिरकर पांच फीसदी तक पहुंच गई है।