Chetan Bhagat

इस वर्ष फरवरी में मुझे राष्ट्रपति भवन में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। इस बहस का उद्‌देश्य भी अच्छा था और इसे बहुत ही अच्छी तरह संचालित किया गया था। देश के शीर्ष केंद्रीय विश्वविद्यालयों के करीब सौ कुलपति सम्मेलन में मौजूद थे। इन्हें कई उप-समूहों में बांटकर देश में शिक्षा क्षेत्र के सामने उपस्थित ज्वलंत विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, सम्मेलन का स्वरूप थोड़ा औपचारिक था, लेकिन जिन विचारों पर चर्चा हुई वे सारे ज्वलंत व प्रासंगिक थे।