बीजेपी

चार राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे एक नई-बिलकुल नई इबारत लिख रहे हैं। इसलिए नहीं कि कांग्रेस दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में से कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी, बल्कि इसलिए कि देश की राजधानी में आम आदमी पार्टी के उभार ने देश को एक नया संदेश दिया है। बमुश्किल एक साल पुराने दल-आप-की दिल्ली में अप्रत्याशित और उल्लेखनीय जीत पर शेष देश में जैसी प्रतिक्रिया हो रही है उससे यह तो साफ है कि आम जनता ने इस संदेश को ग्रहण कर लिया है, लेकिन यह कहना कठिन है कि राजनीतिक दल भी यह सही तरह समझ गए हैं कि उनके लिए अपने तौर-तरीकों में बद

राजनैतिक हितों व वोट बैंक के स्वार्थ के वशीभूत हो सियासी दलों द्वारा निजीकरण, मुक्त बाजार व पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति की चाहे जितनी अनदेखी व आलोचना की जाए। लेकिन वास्तविकता यही है कि महंगाई की समस्या का समाधान किसी सरकार के पास नहीं बल्कि स्वयं बाजार के पास ही होता है। यदि बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति हो तो वस्तुओं/सेवाओं की कीमतों में उतरोत्तर कमी व गुणवत्ता में तुलनात्मक रूप से वृद्धि देखने को मिलती है। अर्थशास्त्र के इस सामान्य से नियम की न केवल अनदेखी की जाती है बल्कि लोगों के मन में बाजार को लेकर भ्रम भी पैदा किया जाता है।