नशा

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे दोनों तरफ पांच सौ मीटर की दूरी पर से शराब की दुकानें हटाने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश क्या दिया, राज्य सरकारों ने शराब की दुकानें आबादी में लगाने की तैयारियां शुरू कर दीं। इसकी वजह से महिलाएं गुस्से में हैं। लेकिन इस फैसले ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। मसलन यह कि क्या गारंटी है कि पांच सौ मीटर दूर होने के बावजूद शराब पीकर लोग गाड़ियां नहीं चलाएंगे। सवाल यह भी है कि क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले लोग हाईवे से पांच सौ मीटर दूर स्थित दुकानों पर नहीं जाएंगे। इस फैसले की काट ढूंढ़ी जाने लगी है। कुछ राज्यों में तो सरकारो

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा जिस भी चीज के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई उस चीज में उतनी ही बढ़ोत्तरी हुई। सरकारों ने भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशा, आतंकवाद जिसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ा दुनिया में उक्त चीजों में कमी आने की बजाए वृद्धि ही हुई है। आशा है कि सरकार आने वाले समय में धन के खिलाफ युद्ध छेड़े ताकि देश में धन की मात्रा में वृद्धि हो..

 

हम भारतीय असहज मुद्दों से बचने में उस्ताद  हैं। असहज मामलों पर चर्चा करने के बजाय हम ढोंगी और झूठा बनना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसा ही एक मुद्दा है शराब के सेवन का, जिस पर चर्चा से परहेज करना हम अच्छी तरह सीख चुके हैं। हमसे उम्मीद की जाती है कि हम शराब से संबंधित हर चीज की सार्वजनिक रूप से आलोचना करेंगे।

दिल्ली में एकबार फिर से पॉलीथिन के प्रयोग व इसकी खरीद-बिक्री को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 15 के तहत प्रतिबंध की अनदेखी करने वालों पर 10 हजार से एक लाख रूपए तक का आर्थिक दंड अथवा सात वर्ष तक की सजा अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। इसके पूर्व वर्ष 2009 में भी दिल्ली में प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगाया गया था। लेकिन उस समय 40 माइक्रोन से मोटे प्लास्टिक व उससे निर्मित वस्तुओं, कैरीबैग आदि को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया था। हाल ही में राजधानी में गुटखे पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि गुटखा, प्लास्टिक आदि के स्वास्थ्य व पर्यावरण पर प