शासन

कुछ हफ्तों पहले मैंने ‘द सोशल नेटवर्क’ देखी। अद्भुत फिल्म है और इसका असर मेरे दिलो-दिमाग से अब तक गया नहीं है।

द एक्सीडेंटल बिलियनेअर्स किताब पर आधारित यह फिल्म सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक के निर्माण की कहानी बताती है। इसमें आधी हकीकत है और आधा फसाना। फिल्म तो खैर बहुत अच्छे ढंग से बनाई ही गई है, इसकी कहानी और भी ज्यादा शानदार है।

एक आदर्श शहर के लिए क्या-क्या जरूरी सुविधाएं हो सकती हैं? 24 घंटे बिजली और पानी? स्वच्छ वातावरण, कार, साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए पर्याप्त चौड़ी सड़कें? शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं, खेल के मैदान, संग्रहालय, आदि? राजनीतिक व्यवस्था में अधिक दिलचस्पी लेने वाले शहर के लिए एक मेयर या महापौर की भी आवश्यकता बता सकते हैं, जिसके पास कर लगाने और प्रशासन के सभी जरूरी अधिकार हों।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

'वॉच डॉग' की भूमिका का निर्वाह करने वाला मीडिया भला 'खतरनाक' कैसे हो सकता है? निष्ठापूर्वक अपने इन कर्तव्य का पालन-अनुसरण करने वाले मीडिया को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने खतरनाक प्रवृत्ति निरूपित कर वस्तुत: लोकतंत्र के इस चौथे पाये की भूमिका और कर्तव्य निष्ठा को कटघरे में खड़ा किया है। वैसे बिरादरी से त्वरित प्रतिक्रिया यह आई है कि चव्हाण की टिप्पणी ही वस्तुत: लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

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इन दिनों तमाम पत्र-पत्रिकाओं में लगातार ही भारत के एक महाशक्ति बनने के कयास लगाये जाते हैं. महाशक्तिमान अमेरिका को चुनौती देते चीन से उसकी तुलना भी की जाती है, मगर भारत की इस महत्वकांक्षा में सबसे बडा रोडा भारत खुद ही है और अगर यह देश अपनी कतिपय किन्तु महत्वपूर्ण खामियों को दूर करने का प्रयास नहीं करेगा तो महाशक्ति बनना बहुत दूर की बात लगती है. मज़े की बात ये है कि कमजोरियां इतनी खुल्लमखुल्ला हैं कि उन्हें आंख मूंदकर भी जाना जा सकता है, बशर्ते हम अपने भीतर ईमानदारी से झांकने को तैयार हों.

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सिख बच्चों के स्कूल में पगड़ी पहनने पर फ्रांस में लगा प्रतिबन्ध फिलहाल जारी रहेगा और इसी के साथ दुनिया में धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदी का प्रश्न एक बार फिर उठता है। फ्रांस के स्कूलों में सिख छात्रों को पगड़ी पहनने की अनुमति देने की समुदाय की माँग के बीच फ्रांस के संस्कृति मंत्री ने सोमवार को कहा कि उनके यहाँ नियम के मुताबिक स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन पर पाबंदी है।

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लोकतंत्र में वोट की ताकत महत्वपूर्ण मानी जाती है और जब इस ताकत का सही दिशा में इस्तेमाल होता है तो इससे एक ऐसा जनमत तैयार होता है, जिससे नए राजनीतिक हालात अक्सर देखने को मिलते हैं। हाल ही में बिहार के 15 वीं विधानसभा के चुनाव में जो नतीजे आए हैं, वह कुछ ऐसा ही कहते हैं। देश में सबसे पिछड़े माने जाने वाले राज्य बिहार में तरक्की का मुद्दा पूरी तरह हावी रहा और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का जादू ऐसा चला, जिसके आगे राजनीतिक गलियारे के बड़े से बड़े धुरंधर टिक नहीं सके और वे चारों खाने मात खा गए। हालांकि बिहार में जो चुनावी नतीजे आएं हैं, इसकी उम्मीद शायद नीतिश

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सरकार के द्वारा गरीबी के रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को मुफ्त घर प्रदान करने की योजना के बाद भी, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अति निर्धन लोग आज भी बिना पक्के घर के ही रह रहे हैं.

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दिल्ली राज्य में गरीबो  को समाज सुधार योजनाओं का लाभ सिंगल विंडो के ज़रिये पहुचाने के लिए 'मिशन कन्वरजेंस' या सामाजिक सुविधा संगम एक अनूठा और लाभदायक प्रयोग है. इस मिशन का उद्देश्य समुदायों के करीब जा कर वितरण बिन्दुओं को खड़ा करना है ताकि गरीब जनता विभिन्न सामाजिक योजनाओं का फल आसानी से उठा सके. एक सोसाइटी की तरह रजिस्टर्ड सामाजिक सुविधा संगम राज्य के तमाम विभागों, NGOs और नोडल एजेंसिओं के लिए एक सुविधा केंद्र की तरह है.

गरीब की रोटी का एक बड़ा सहारा राशन की दुकान भी होती है पर यह एक ऐसी सरकारी व्यवस्था है जो सिर्फ हाथी के दांतों की तरह दिखावटी है. जिस तरह हांथी के दांतों पर बाहुबलियों का कब्जा रहता है ठीक उसी तरह इस योजना पर भी डंडा तंत्र का कब्जा है. बुंदेलखंड में छतरपुर जिले का  किशनगढ़  इलाका आदिवासी  बाहुल्य है. इस क्षेत्र में आदिवासियों के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जाता है इसकी बानगी देखने को मिली. यहाँ की सुकुवाहा ग्राम पंचायत में 70 फीसदी आदिवासी व 30 फीसदी हरिजन हैं. 1200 की आबादी वाले इस गाँव में लोगों को कई कई महीनो तक अंनाज नहीं मिलता. यहाँ पी.ड़ी.एस. वितरण का सिस्टम भी काफी जोरदार है. आधा सामान किशनगढ़  में मिलता है और आधा पल्कोंहा में, दोनों की दूरी गाँव से 20-20 कि.मी.है.

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तकरीबन 20 साल पहले जब मैं ग्यारहवीं या बारहवीं का छात्र था, मैंने शोलपुर में होने जा रही स्कूली बच्चों की राज्यस्तरीय शतरंज स्पर्धा के लिए पात्रता हासिल कर ली। मैं पुणे की टीम का हिस्सा था और इस स्कूल चैंपियनशिप में भारत के तकरीबन हर इलाके के स्कूली छात्र भाग लेते थे। हालांकि वह स्कूली चेस का पहला ही साल था। जब हमारी चार सदस्यीय टीम स्पर्धा से एक दिन पहले ही पहुंच गई, तो हमें एक बड़े हॉल में ले जाया गया। हमें बताया गया कि रात को हमें यहीं पर सोना है। वहां पहुंचे अन्य एथलीट और खिलाड़ी भी इसी हॉल में हमारे साथ सोने वाले थे। सामान्य परिस्थितियों में उस हॉल में 60

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