शासन

लोकतंत्र में वोट की ताकत महत्वपूर्ण मानी जाती है और जब इस ताकत का सही दिशा में इस्तेमाल होता है तो इससे एक ऐसा जनमत तैयार होता है, जिससे नए राजनीतिक हालात अक्सर देखने को मिलते हैं। हाल ही में बिहार के 15 वीं विधानसभा के चुनाव में जो नतीजे आए हैं, वह कुछ ऐसा ही कहते हैं। देश में सबसे पिछड़े माने जाने वाले राज्य बिहार में तरक्की का मुद्दा पूरी तरह हावी रहा और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का जादू ऐसा चला, जिसके आगे राजनीतिक गलियारे के बड़े से बड़े धुरंधर टिक नहीं सके और वे चारों खाने मात खा गए। हालांकि बिहार में जो चुनावी नतीजे आएं हैं, इसकी उम्मीद शायद नीतिश

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सरकार के द्वारा गरीबी के रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को मुफ्त घर प्रदान करने की योजना के बाद भी, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अति निर्धन लोग आज भी बिना पक्के घर के ही रह रहे हैं.

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दिल्ली राज्य में गरीबो  को समाज सुधार योजनाओं का लाभ सिंगल विंडो के ज़रिये पहुचाने के लिए 'मिशन कन्वरजेंस' या सामाजिक सुविधा संगम एक अनूठा और लाभदायक प्रयोग है. इस मिशन का उद्देश्य समुदायों के करीब जा कर वितरण बिन्दुओं को खड़ा करना है ताकि गरीब जनता विभिन्न सामाजिक योजनाओं का फल आसानी से उठा सके. एक सोसाइटी की तरह रजिस्टर्ड सामाजिक सुविधा संगम राज्य के तमाम विभागों, NGOs और नोडल एजेंसिओं के लिए एक सुविधा केंद्र की तरह है.

गरीब की रोटी का एक बड़ा सहारा राशन की दुकान भी होती है पर यह एक ऐसी सरकारी व्यवस्था है जो सिर्फ हाथी के दांतों की तरह दिखावटी है. जिस तरह हांथी के दांतों पर बाहुबलियों का कब्जा रहता है ठीक उसी तरह इस योजना पर भी डंडा तंत्र का कब्जा है. बुंदेलखंड में छतरपुर जिले का  किशनगढ़  इलाका आदिवासी  बाहुल्य है. इस क्षेत्र में आदिवासियों के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जाता है इसकी बानगी देखने को मिली. यहाँ की सुकुवाहा ग्राम पंचायत में 70 फीसदी आदिवासी व 30 फीसदी हरिजन हैं. 1200 की आबादी वाले इस गाँव में लोगों को कई कई महीनो तक अंनाज नहीं मिलता. यहाँ पी.ड़ी.एस. वितरण का सिस्टम भी काफी जोरदार है. आधा सामान किशनगढ़  में मिलता है और आधा पल्कोंहा में, दोनों की दूरी गाँव से 20-20 कि.मी.है.

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तकरीबन 20 साल पहले जब मैं ग्यारहवीं या बारहवीं का छात्र था, मैंने शोलपुर में होने जा रही स्कूली बच्चों की राज्यस्तरीय शतरंज स्पर्धा के लिए पात्रता हासिल कर ली। मैं पुणे की टीम का हिस्सा था और इस स्कूल चैंपियनशिप में भारत के तकरीबन हर इलाके के स्कूली छात्र भाग लेते थे। हालांकि वह स्कूली चेस का पहला ही साल था। जब हमारी चार सदस्यीय टीम स्पर्धा से एक दिन पहले ही पहुंच गई, तो हमें एक बड़े हॉल में ले जाया गया। हमें बताया गया कि रात को हमें यहीं पर सोना है। वहां पहुंचे अन्य एथलीट और खिलाड़ी भी इसी हॉल में हमारे साथ सोने वाले थे। सामान्य परिस्थितियों में उस हॉल में 60

ताकत हासिल कर लेना एक बात है और उसका इस्तेमाल करना दूसरी। पिछले दिनों जब दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की भेंट हुई तो यह दो निराश नेताओं की भेंट थी। ओबामा जहां अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में नाटकीय हार से हैरान थे, वहीं मनमोहन सिंह एक के बाद एक हो रहे घोटालों के खुलासों से परेशान थे।

Author: 
गुरचरण दास

बिहार में नीतीश कुमार की लहर चली है। उन्हें इस बार जीत पांच साल पहले के विधानसभा चुनाव और पिछले साल के लोकसभा चुनाव से भी बड़ी मिली है। पिछले साल भी उनके नेतृत्व वाले एनडीए को 171 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी। मगर अब आंकड़ा उसके पार चला गया है।

बेशक, विजेता के जयगान की परंपरा के तहत अब बिहार के चुनाव नतीजों को नीतीश कुमार और उनके गठबंधन के दावों के नजरिए से देखा जाएगा। और इसे विकास की जीत बताया जाएगा। जीत इतनी बड़ी है कि इस वक्त इस दावे को चुनौती देने की हिम्मत शायद ही कोई दिखा सके। लेकिन इस दावे को चुनौती दिए जाने की जरूरत है।

यह ठीक है कि लालू-राबड़ी राज के आखिरी पांच वर्षों में बिहार में जैसी अराजकता रही और विकास के साधारण पैमानों की जैसी अनदेखी की गई, उसकी तुलना में नीतीश कुमार के राज में हालत में सुधार हुआ। कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार शायद उनकी सबसे बड़ी कामयाबी रही। इसके अलावा पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण और लड़कियों को साइकिल बांटने जैसे प्रगतिशील कदमों ने भी उनकी लोकप्रियता बढ़ाई। मगर यह जीत सिर्फ ऐसे कदमों का नतीजा नहीं है।

हाल ही में अमेरिका के ओहायो प्रांत के गवर्नर स्ट्रीकलैंड ने नौकरियों के सृजन के लिए उन कंपनियों के लिए आउटसोर्स पर प्रतिबंध लगा दिया जिन्हें सरकारी फंड्स के जरिए मदद नहीं पहुंचाई जाती है। ओहायो के गवर्नर के इस फैसले का भारत में काफी विरोध हुआ। हालांकि इस हो हल्ले का कोई फायदा नहीं मिला। गौर करने वाली बात ये भी है कि अमेरिका और अमेरिकी राज्यों में हमारी देसी आईटी कंपनियों का निर्यात सीमित मात्रा में ही होता है।

हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि वे अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान इस फैसले पर अमेरिकी प्रशासन के साथ अपना एतराज दर्ज करवाएंगे। लेकिन ये एक कूटनीतिक खाना पूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं था।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

मशहूर लेखिका और बुकर प्राइज़ विजेता अरुंधती रॉय का हाल ही में श्रीनगर में कश्मीर के ऊपर दिया हुआ बयान काफी विवादस्पद साबित हुआ. नाराज़ लोगों नें उन्हें देशद्रोह के अपराध में दण्डित करने की पुरजोर वकालत की. अरुंधती का विवादों में पड़ना कोई नयी बात नहीं है. देश से जुडे कई संवेदनशील मुद्दों पर अपने क्रन्तिकारी विचारों को प्रगट कर वो पहले भी घेरे में आ चुकी हैं.

 

दिल्ली के ऑटो रिक्शा चालाक इस वीडिओ में अपनी परेशानियों का वर्णन कर रहे हैं. उनका कहना है कि मीटर न चलाना उनकी मजबूरी है. मीटर सहित ऑटो के सभी पार्ट्स काफी महंगे आते हैं और उन का नियमित  रख रखाव भी काफी महंगा है. दिल्ली में 10 में से 9 ऑटो निजी वित्तदाताओं के होते हैं, जो हर रोज़ उन्हे किराए पर देते हैं. जितना पैसा ऑटो चालाक एक महीने में कमाते हैं, वो उनकी घर गृहस्थी चलाने के लिए भी काफी नहीं है, बचत तो बहुत दूर की बात है.  और सरकार का शहर में चलने वाले ऑटो की संख्या निर्धारित करना भी जीविका के अधिकार का हनन प्रतीत होता है.

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