शासन

ब्रिटिश एयरवेज और लुफ्तहांसा। एयरलाइंस की दुनिया में चमकते ऐसे नाम हैं जिनके विमानों में हर शख्स एक ना एक बार यात्रा जरूर करना चाहता है। इनकी बेहतरीन सर्विस और शानदार मेहमाननवाजी का हर कोई कायल है लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था। 1987 में ब्रिटेन की सरकारी एयरलाइंस ब्रिटिश एयरवेज में घाटा जब लगातार बढ़ता गया और कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई तो वहां की सरकार ने एविएशन सेक्टर से निकलने का फैसला कर लिया। कुछ ऐसा ही 1994 में जर्मनी की लुफ्तहांसा के साथ हुआ। भारी घाटे और कर्ज के बोझ से लुफ्तहांसा दब चुकी थी। जर्मन सरकार ने समय रहते उसे निजी

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। वर्ष 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ही सीबीएफसी का नाम अक्सर किसी न किसी विवाद से जुड़ता ही रहा है। विवाद की स्थिति कभी किसी राजनैतिक दल से करीबी रिश्ता रखने वालों को बोर्ड का प्रमुख बनाए जाने के कारण तो कभी किसी फिल्म/दृश्य को प्रसारित किए जाने की अनुमति देने अथवा न देने के कारण पैदा होती रही है। कभी किसी सीईओ के रिश्वत लेकर फिल्मों के प्रसारण की अनुमति देने के कारण तो कभी किसी फिल्म को प्रसारण की अनुमति न देने के कारण। कभी एक फिल्म में 21 कट्स लगाने का आदेश देने

हाल ही में लोकसभा में एक एक विधेयक पारित हुआ है जिसके कानून बन जाने की सूरत में देश मे लगभग आठ लाख शिक्षकों की कमी हो जाएगी। पारित विधेयक के अनुसार 31 मार्च 2019 तक सभी सरकारी ग़ैरसरकारी शिक्षको को बीएड की डिग्री हासिल करनी है अन्यथा वो कहीं पढ़ाने योग्य नही रहेंगे। लोकसभा में पारित मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार संशोधन विधेयक में हुई चर्चा के दौरान ये बात सामने आयी कि इस समय निजी स्कू लों में करीब 5 लाख और सरकारी स्कूलों में ढाई लाख से ज्यादा गैर प्रक्षिशित लोग पढ़ा रहे है जो काफी नुकसानदायक है। फिलहाल ये विधेयक राज्य सभा मे जाएगा और देश की

पुलिस दुराचरण के विरुद्ध लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। वर्ष 2007 में बनाए गए विभिन्न राज्यों के विकलांग पुलिस कानून में प्रावधान की गयी कमेटियों का आजतक गठन नहीं हुआ है व राजस्थान उनमें से एक है। यद्यपि इन कमेटियों के गठन से भी धरातल स्तर पर कोई लाभ नहीं होने वाला क्योंकि जांच के लिए पुलिस का ही सहारा लिया जाता है। आखिर कोई भी पेड़ अपनी शाखा को किस प्रकार काट सकता  है?

11 जुलाई, 1987 में विश्व की जनसंख्या ने 5 अरब के आंकड़े को पार किया था। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। तब से इस विशेष दिन को हर साल एक याद और परिवार नियोजन का संकल्प लेने के दिन के रूप में याद किया जाने लगा। इसी क्रम में बीते 11 जुलाई को भी दुनिया भर में 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाया गया। विभिन्न मंचों पर विशेषज्ञों, चिंतकों, नीति-निर्धारकों आदि ने बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी समस्या और इसकी भयावहता से लोगों को अवगत कराते हुए अपनी चिंताएं प्रदर्शित की। विशेषज्ञों ने जन

भारत में फीस लेने वाले प्राइवेट स्कूलों को स्नेह और नापसंदगी दोनों समान रूप से प्राप्त है। बच्चों की शिक्षा के लिए एक तरफ तो ये स्कूल अभिभावकों के लिए काफी मूल्यवान हैं, वहीं दूसरी तरफ इन्हें या तो 'बच्चों के जीवन के साथ खेलने वाली शिक्षा की दुकानों (टीचिंग शॉप्स)' अथवा ऊंची फीस वसूलने वाले मुनाफाखोर संस्थाओं के तौर पर नापसंद भी किया जाता है। प्राइवेट स्कूलों की नैतिकता का प्रश्नचिन्ह होने के बावजूद देश में सभी प्रकार की प्राइवेट शिक्षा जैसे कि झुग्गी झोपड़ियों में चलने वाले प्राइवेट स्कूलों से लेकर कुलीन प्राइवेट स्कूलों के विस्तार के साथ एक

70000 वर्ष पूर्व शुरू हुई ‘संज्ञानात्मक क्रांति’ से मानव समाज की ‘ज्ञान यात्रा’ वैज्ञानिक क्रांति, औद्योगिक क्रांति, सूचना क्रांति जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरती हुई आज के दौर में पहुँची हैं और शिक्षा इस लंबे मानव जीवन की सहचारिणी रही हैं। हालाँकि प्रारम्भ से ही शिक्षा ‘स्वतंत्र समाज’ का हिस्सा रही हैं लेकिन जबसे ‘राज्य-राष्ट्र’ के सिध्दान्त का उदय हुआ हैं; सभी देशों मे यह सरकारी व्यवस्था के एकाधिकार का शिकार बनकर रह गयी हैं। चूँकि किसी भी देश में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही वहाँ के मानव संसाधन की गुणवत्ता निर्धारित करती हैं इसलिए शिक्षा

शिक्षा निदेशालय ने 22 मार्च 2013 को एक परिपत्र (सर्क्युलर) जारी कर अनधिकृत कॉलोनियों में संचालित होने वाले प्राइमरी स्कूलों व मिडिल स्कूलों के लिए भूमि की न्यूनतम सीमा की अनिवार्यता में ढील दी थी। वर्तमान में यह सीमा प्राइमरी स्कूलों के लिए 200 स्क्वायर यार्ड और मिडिल स्कूलों के लिए 700 स्क्वायर मीटर (857 स्क्वायर यार्ड) है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य सुशासन के लिए काम करना होता है। वह सुशासन जो प्रमुख रूप से आठ अव्यवों से मिलकर
तैयार होता है। ये अव्यव हैंः
विधि का शासन अर्थात rule of law
समानता एवं समावेशन अर्थात equity and inclusiveness
भागीदारी अर्थात participation
अनुक्रियता अर्थात responsiveness
बहुमत या मतैक्यता अर्थात consensus oriented
प्रभावशीलता व दक्षता अर्थात effectiveness and efficiency
पारदर्शिता अर्थात transparency

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