दिल्ली पुलिस

पुलिस दुराचरण के विरुद्ध लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। वर्ष 2007 में बनाए गए विभिन्न राज्यों के विकलांग पुलिस कानून में प्रावधान की गयी कमेटियों का आजतक गठन नहीं हुआ है व राजस्थान उनमें से एक है। यद्यपि इन कमेटियों के गठन से भी धरातल स्तर पर कोई लाभ नहीं होने वाला क्योंकि जांच के लिए पुलिस का ही सहारा लिया जाता है। आखिर कोई भी पेड़ अपनी शाखा को किस प्रकार काट सकता  है?

 

जैसा चलन चल पड़ा है कि कहीं से कोई सुर्रा उठ जाने पर हम उससे जुड़ी हर चीज, हर व्यवस्था, सरकार, देश और समूची दुनिया को भ्रष्ट बताने लगते हैं, उसी तरह आईपीएल में फिक्सिंग का मामला एक बार फिर उभर आने के बाद इस पूरे टूर्नामेंट, लीग और देश के समूचे क्रिकेट सरंजाम को ही कूड़ेदान में डालने पर उतावले न हो जाएं।

स्कूल से सीधे घर जाएं और अगर कहीं दूसरी जगह जा रहे हैं तो अपने माता-पिता को बताकर जाएं। महिला सुरक्षा के मामले में लगातार फजीहत झेल रही दिल्ली पुलिस के नाम से ऐसी तमाम नसीहतें देने वाले होर्रि्डग व बैनर दिल्ली विश्वविद्यालय के अग्रणी कॉलेजों और अन्य शिक्षा संस्थानों के बाहर पिछले दिनों दिखाई दिए। इन पर दिल्ली पुलिस का ईमेल और फोन नंबर भी लिखे हैं। इन नसीहत भरे पोस्टरों पर लोगों के आपत्ति उठाने के बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया। पुलिस कह रही है कि वह बता नहीं सकती कि ये बैनर किसने लगाए हैं। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी जानकारी होने से इन्कार कर दिया