विकल्प

स्किल डेवलपमेंट अर्थात् कौशल विकास वर्तमान दौर में एक वैश्विक मुद्दा बन चुका है। इसमें कोई शक नही कि तकनीक के इस दौर में दुनिया को स्किल्ड लोगों की जबरदस्त मांग है। दुनिया उन देशों की तरफ देख रही है जहाँ युवाओं की संख्या ज्यादा है और वे युवा वर्तमान दौर के हिसाब से कौशलयुक्त हैं। इस लिहाज से सोचा जाय तो भारत एक संभावनाओं का देश है क्योंकि यहाँ की पैसठ फीसद आबादी पैंतीस साल से कम आयु की है। लिहाजा युवाओं को स्किल्ड बनाने की चुनौती और दुनिया की अपेक्षाओं के अनुरूप युवाशक्ति तैयार करने का दबाव भी भारत पर है। अब सवाल है कि क्या हम अपने प्रयासों स

- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी ने महाराष्ट्र में तीन वर्षों तक चलाया 'स्किल वाउचर' पायलट प्रोजेक्ट
- कैरियर मेले का आयोजन कर 2000 युवाओं के कौशल विकास में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
- 3-4 माह के प्रशिक्षण के बाद युवाओं को अमेजन व एचडीएफसी बैंक सहित तमाम राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मिली नौकरी

एक बार फिर स्कूल एडमीशन की सरगर्मियां जोरो पर है। इसी बीच स्कूल संगठनों ने यह मांग दोहराई है कि उन्हें मैनेजमेंट कोटा के अंन्तर्गत एडमीशन की छूट दी जाए। पर जिस तरह से मैनेजमेंट सीटों की नीलामी की जाती है, उसे देखते हुए सरकार शायद ही इसे छूट दे। आखिर ऐसा क्यों है कि निजी स्कूल मनमाने पैसे वसूल कर नर्सरी में दाखिला देना चाहते है?

जब कानून, लोगों को अपने हिसाब से जीने के अधिकार से वंचित रखता है तब व्यक्ति के पास कानून तोड़ने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं रह जाता है...
 
- नेल्सन मंडेला

चार राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे एक नई-बिलकुल नई इबारत लिख रहे हैं। इसलिए नहीं कि कांग्रेस दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में से कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी, बल्कि इसलिए कि देश की राजधानी में आम आदमी पार्टी के उभार ने देश को एक नया संदेश दिया है। बमुश्किल एक साल पुराने दल-आप-की दिल्ली में अप्रत्याशित और उल्लेखनीय जीत पर शेष देश में जैसी प्रतिक्रिया हो रही है उससे यह तो साफ है कि आम जनता ने इस संदेश को ग्रहण कर लिया है, लेकिन यह कहना कठिन है कि राजनीतिक दल भी यह सही तरह समझ गए हैं कि उनके लिए अपने तौर-तरीकों में बद

नकद नारायण के दिव्य दर्शन तो हमेशा ही लोगों को आनंदित करते रहे है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि नकद हस्तांतरण की सरकारी योजना आने के बाद से वह लोग गदगद है जिन्हें इस योजना का लाभ मिलनेवाला है।लेकिन उनसे ज्यादा गदगद यूपीए के नेता हैं जिन्हें लग रहा है कि उनके हाथों में तो गोया जादू की छड़ी लग गई है जिससे अगले चुनाव में उसके पास वोट खींचे चले आएंगे और उसकी जीत सुनिश्चित हो गई है। उसका मानना है कि पिछले आमचुनाव में मनेरगा ने जीता दिया यह चुनाव नकदी हस्तांतरण योजना जितवा देगी।वैसे विपक्ष को भी नकदी योजना की अपार संभावनाओं का अहसास है इसलिए उसने अभी से उसका विरोध करना शुरू कर दि