Swaminomics

अपनी युवावस्था के दिनों में मैंने निचले स्तर तक आर्थिक लाभ के सिद्धांत (थ्योरी ऑफ इकोनॉमिक ट्रिकल डाउन) के बारे में सुना था। इसके मुताबिक अगर अमीर और अधिक अमीर होंगे तो गरीबों को भी इसका लाभ मिलेगा और इस वजह से यह सबके लिए फायदेमंद रहेगा। ऐसा माना जा रहा था कि यह इस बात का भी खुलासा कर देगा, कार्ल मार्क्स के विपरीत, कि यह सच नहीं है कि अमीर और अमीर हो गए, जबकि गरीब और गरीब। इसके विपरीत हुआ यह कि दोनों ही साथ-साथ अमीर हुए। अमेरिका में गरीबी की रेखा 11 हजार डॉलर प्रति वर्ष (पांच लाख रुपए प्रति वर्ष) की चौंकाने वाली ऊंचाई तक पहुंच गई है। इतिहास

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स्वामीनाथन अय्यर

दिल्ली में पैरामेडिक लड़की पर हुए हमले और बलात्कार के खिलाफ बड़े पैमाने विरोध प्रदर्शन हुए और इस बात की आलोटना भी की गईं कि हम महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार क्यों करते हैं। इस व्यवहार की एक प्रमुख वजह है फिल्म उद्योग जिसका कम ही जिक्र हुआ है। वह बेहद प्रतिगामी पुरूष व्यवहार को जन्म देता है इस कारण आंशिक रूप से दुर्व्यवहार के लिए  जिम्मेदार है।

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स्वामीनाथन अय्यर

जैसे गुजरात  का चुनाव अभियान अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है कई पर्यवेक्षक भाजपा के नरेंद्र मोदी की भारी जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं कुछ तो मानते हैं कि 2007 से भी ज्यादा बड़ी जीत हो सकती है। इससे वह अगले आमचुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बन सकते हैं।

कांग्रेस पार्टी की हालत खस्ता है । वह भारी महंगाई,गिरती आर्थिक विकास दर और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। इससे भाजपा को कई दलों के गठबंधन के अगुवा के तौरपर1998 और 1999 की तरह फिर से सत्ता में आने का मौका मिल सकता है। इसका मतलब है कि मोदी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

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स्वामीनाथन अय्यर

लकवाग्र्सत और जोखिम उठाने से डरनेवाली यूपीए-2 अचानक जोखिम उठानेवाली सुधारवादी बन गई है। पिछले हफ्ते उसने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे पर संसद में हारने तक का जोखिम उठाया। उसकी जीत बताती है कि भाग्य भी बहादुर लोगों का साथ देता है।

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स्वामीनाथन अय्यर

कांग्रेस पार्टी जल्दी ही एक कार्यक्रम शुरू करनेवाली है जिसके बारे में उसका खयाल है कि वह चुनाव जीताऊ होगा। यह कार्यक्रम है –इलेक्ट्रानिक नकदी हस्तांतरण योजना । इसके जरिये सरकारी भुगतानों और सब्सिडियों को मौजूदा भ्रष्टाचार और अपव्यय वाले तरीकों के बजाय सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजा जाएगा। 1जनवरी से सरकार 29 किस्म के लाभों को (जैसे पेंशन, स्कालरशिप, ईंधन सब्सिडी) सभी की इलेक्ट्रानिक पहचान करनेवाली आधार योजना का फायदा उठाते हुए  नकदी हस्तांतरण योजना के तहत हस्तांतरित किया  जाएंगा। कुछ समय बाद 42 लाभों को इस योजना के तहत लाया जाएगा। 2014 में अगले आम चुनाव के सम

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स्वामीनाथन अय्यर

गुजरात चुनाव में फिर ये आरोप फिर दागे जाएंगे कि नरेंद्र मोदी  ने 2002 में गुजरात में  एक हजार मुस्लिमों की हत्या  कराई और भाजपा राजीव गांधी पर  1984 के दिल्ली दंगों में 3000 सिक्खों की हत्या का आरोप लगाएगी। इन सब चीजों को एक परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए मैंने पिछले दशकों के सांप्रदायिक दंगों में शोध किया। मुझे यह जानकर अचरज हुआ कि सबसे बड़ा सांप्रदायिक हत्याकांड मोदी और राजीव के मातहत नहीं वरन नेहरू के शासनकाल में हुआ था। उनके शासनकाल में 1948 में  हैदराबाद पर कब्जे के दौरान 50000 से 200000 के बीच मौतें हुईं। इस हत्याकांड के बारे में बनी सुंदरलाल

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स्वामीनाथन अय्यर

चुनाव में बडे पैमाने पर पैसा खर्च करना केवल भारत की विशेषता नहीं है। अमेरिका ने हाल के चुनाव पर 7 बिलियन डालर खर्च किए जो 2008 के 5बिलियन डालर से ज्यादा है। इनमें से आधे राष्ट्रपति चुनाव और आधे कांग्रेस के चुनाव में खर्च हुए।इसके बावजूद नतीजे बताते हैं कि भारी चुनावी खर्च से पैसों की बर्बादी हुई।

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स्वामीनाथन अय्यर

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समूह ने जेनेटीकली मॉडीफाइड (जीएम) फसलों के फील्ड ट्रायल पर 10 साल की पाबंदी लगाने का सुझाव दिया है। इससे निकट भविष्य में उनकी फसल उगाए जाने की संभवना पर रोक लग जाएगी। कांसार्टियम इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन्स के महासचिव चेंगल रेड्डी ने इसका यह कहकर विरोध किया है कि यह किसानों के हितों के खिलाफ है जिन्हें ज्यादा पैदावार देनेवाली  और कम कीटनाशकों का उपयोग करनेवाली जीएम फसलों की जरूरत है । भारतीय उपभोक्ताओं को भी ज्यादा उत्पादन और कीटनाशकों के कम इस्तेमाल से लाभ होगा।

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स्वामीनाथन अय्यर

क्या राबर्ट वढेरा के बारे में भंडाफोड़ भ्रष्टाचार को खत्म कर देगा ? या यह एक और सनसनी है जो मध्यम वर्ग को कुछ सप्ताह तक झनझनाती रहेगी और फिर उसे भुला दिया जाएगा। क्या राजनीति भारत का अबतक का सबसे बड़ा धंधा है?

मैं बहुत आशावादी नहीं हूं। हर पार्टी के राजनीतिज्ञ अपने प्रतिद्वंदियों पर कीचड उछालना पसंद करते हैं। एक अच्छे व्यापारी के तौर पर उनको उम्मीद होती है कि कि इससे उनका मार्केट शेयर बढ़ जाएगा। लेकिन क्या वे व्यापार को पूरी तरह बंद करेंगे और कम लाभदायक धंधे में चले जाएंगे। मुझे संदेह है।

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स्वामीनाथन अय्यर

आज की भारतीय राजनीति राजनीतिज्ञों से कम और सुप्रीम कोर्ट और महा लेखा नियंत्रक (सीएजी)द्वारा ज्यादा संचालित हो रही है।इसका भारतीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब यह है कि हम भारत की संवैधानिक संस्थाओं द्वारा भ्रष्ट और बेरहम राज्य के खिलाफ बगावत देख रहे हैं। एक अंतर्निहित राजनीतिक साझिश यह सुनिश्चित करती है कि सभी राजनीतिक दल बड़े पैमाने पर ऱिश्वत और भाईभतीजावाद में बड़े पैमाने पर लिप्त  होते हैं। ऐसे माहौल में नतीजे केवल न्याय से नहीं वरन पैसे, बाहुबल और प्रभाव से तय होते हैं।

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स्वामीनाथन अय्यर

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