बाजारवाद

स्वतंत्रता दिवस का अवसर थोड़ा रुकने, रोजमर्रा की घटनाओं पर सोच का दायरा बढ़ाने और पिछले 68 साल के दौरान अपने देश की यात्र पर नजर डालने का बढ़िया वक्त होता है। आजाद देश के रूप में अपने भ्रमपूर्ण इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूं तो कुहासे में मील के तीन पत्थरों को किसी तरह देख पाता हूं। अगस्त 1947 में हमने अपनी राजनीतिक लड़ाई जीती। जुलाई 1991 में आर्थिक आजादी हासिल की और मई 2014 में हमने सम्मान हासिल किया।
 
Author: 
गुरचरण दास

एक दशक भी नहीं हुआ है जब उत्साही निवेश विशेषज्ञ और आर्थिक विश्लेषक भारत की तरक्की के गीत गा रहे थे। वे कहते थे भारत में इतनी क्षमता है कि अगले दो दशकों में यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा। इसके लिए उन्होंने स्प्रेडशीट मॉडल्स का उपयोग किया। इसमें उन्होंने 8 से 10 फीसदी प्रतिवर्ष की वृद्धि दर डाली और अगले 30 साल का अनुमान निकाला। उन्होंने एमबीए स्कूलों में सीखा था कि कैसे ऐतिहासिक दरों के आधार पर पूर्वानुमान लगाते हैं। जाहिर है, कोई भी चीज जो 10 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रही हो, 30 साल में महाकाय हो जाएगी (ठीक-ठीक कहें

विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कांग्रेस एवं संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद छोड़कर राजनीतिक रूप से भी हलचल पैदा की है। वह इस परिषद में इसलिए काम करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी की दर से वेतन दिए जाने की अनुशंसा को अस्वीकार कर दिया। ऐसा लगता है कि मनमोहन सरकार के प्रति उनकी नाराजगी कुछ ज्यादा ही है, क्योंकि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से मुक्त होने के बाद उन्होंने केंद्रीय सत्ता पर यह आरोप भी मढ़ा कि वह आम लोगों को नजरअंदाज कर आर्थिक वृद्धि हासिल करने पर तुली ह

मुम्बई में आयोजित वर्ल्ड सोशल फोरम का शोक गीत सम्पन्न हुआ। दुनिया भर से आए हुए मन-मुग्ध वामपंथी , स्वघोषित प्रगतिशील और एनजीओ उद्योग के स्वामी वैकल्पिक विश्व की तस्वीर खींच कर चले गए। मार्क्सवादी अवधारणा का समाजवाद रूस , पूर्वी यूरोप तथा अब चीन से भी अलविदा हो गया , इस पर चर्चा नहीं हुई। समाजवाद को फिर से स्थापित करने पर भी चर्चा नहीं हुई। बाजारवाद और साम्राज्यवाद से मुक्त विश्व ही एक विकल्प है , ऐसा कहा गया। बाजारवाद को विश्व का शत्रु घोषित कर दिया गया।

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