China

जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2mD5QI9 बाद में एक बार http://azadi.me/population_boon_not_bane इसे भी पढ़ना चाहिए...
Category: 

भारत के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर भले ही निचला हो, लेकिन यहं के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के वेतन पर चीन और जापान के मुकाबले भारत ज्यादा खर्च कर रहा है। भारत के 9 राज्यों (यूपी, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक, मिजोरम, छत्तीसगढ़) में सकल घरेलू उत्पाद का 3.0 फीसदी खर्च शिक्षकों के वेतन पर हो रहा है, जबकि शिक्षकों के वेतन पर अन्य एशियाई देश कई गुना कम खर्च कर रहे हैं।

भारत और चीन के तीव्र आर्थिक विकास ने पश्चिमी देशों के लिए संकट पैदा कर दिया है. अभी तक विकासशील देश अपने संसाधनों को स्वेच्छा से सस्ते मूल्य पर पश्चिमी देशों को उपलब्ध करा रहे थे. परिणाम स्वरूप पश्चिमी देशों के बीस फीसदी लोग विश्व के अस्सी फीसदी संसाधनों का उपभोग कर रहे थे. यह व्यवस्था स्थिर थी चूंकि  भारत स्वयं अपने संसाधनों का निर्यात करने को तत्पर था. पिछले दो दशक में भारत एवं चीन के तीव्र आर्थिक विकास ने पश्चिमी देशों के इस सुख में अनायस ही अड़चन पैदा कर दी है. इन दोनों देशों ने संसाधनों की खपत स्वयं बड़े पैमाने पर चालू कर दी है.

एक प्रमुख वैश्विक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने एक बार कहा था कि जब भी उन्होंने भारतीय लोगों पर दाव लगाया तो उनका दावा कारगर सिद्घ हुआ लेकिन जब भी भारतीय बाजारों के बारे में उन्होंने वही रुख अपनाया, तो उन्हें वैसा नतीजा हासिल नहीं हो पाया। कुछ वर्ष पश्चात उन्होंने कहा कि यहां तक कि भारतीय बाजारों को लेकर भी उनके दाव दुरुस्त होते जा रहे हैं लेकिन अभी भी सरकार पर दाव लगाना सही विचार नहीं है। आर्थिक सुधारों का सूत्रपात हुए बीस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यह बात अभी भी कमोबेश वैसी ही है।

Category: 

पिछले कई दशकों तक भारत भुखमरी, फॉरेन एड और घूसखोरी में दुनिया में नंबर वन रहा, लेकिन साल 2000 से शुरू हुआ नया दशक हर दौड़ में पिछड़ने वाले इस देश के संभावित महाशक्ति में बदलने का गवाह बना। 21वीं सदी का एक और दशक पूरा करने पर यानी 2020 में भारत का स्वरूप क्या होगा, इस बारे में पेश हैं 8 संभावनाएं।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

पिछले तीन-चार वर्षों में अमेरिका और यूरोप को भारत से होने वाले निर्यात की रफ्तार धीमी हुई है. ऐसे में भारत द्वारा नए निर्यात बाजार खोजे जा रहे हैं. इसी परिप्रेक्ष्य में मई 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अफ्रीकी देशों की यात्रा की. उन्होंने अदीस अबाबा में आयोजित अफ्रीका-भारत फोरम के शिखर सम्मेलन में 15 अफ्रीकी देशों के लिए पांच अरब डॉलर के कर्ज की घोषणा की और अफ्रीकी देशों से कारोबारी संबंध बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए.

Pages