विकसित देश

व्यापार में कुछ खास नैतिक खतरे नही है। कोई भी काम जिसमें सही या गलत में चुनाव करना पड़े उसमें नैतिक खतरा होता ही है। व्यापारी भले ही अपने काम में ज्यादा नैतिक दुविधा का सामना करता है लेकिन यह किसी राजनेता या नौकरशाह की दुविधा से ज्यादा नही होता होगा।
 

जिन लोगों को ये लगता हो कि किसानों की समस्या का एकमात्र समाधान सब्सिडी है, तो उन्हें न्यूजीलैंड देश से कुछ सबक सीखना चाहिए..। न्यूजीलैंड एकमात्र देश है जो दुनिया का एकमात्र विकसित देश है जहां कृषि कार्य के लिए कोई सब्सिडी नहीं दी जाती है। वास्तव में, कृषि क्षेत्र से सब्सिडी हटाने के बाद वहां इस क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति  हुई। आज न्यूजीलैंड द्वारा विश्व को किए जाने वाले कुल निर्यात में दो तिहाई हिस्सा कृषि उत्पादों का है..

- स्टूडेंट्स फॉर लिबर्टी

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंदी की चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ रही है। आर्थिक विकास के दर का अध्ययन करने वाली तमाम संस्थाएं दुनियाभर में मंदी को आसन्न मान रहीं हैं। प्रतिक्रिया स्वरूप सबसे पहले अमेरिका जैसे देश ने अपनी अर्थव्यवस्था को मंदी से अप्रभावित रखने और व्यवसायियों को फौरी राहत देने के तौर पर संरक्षणवाद का लबादा ओढ़ना शुरू कर दिया है। पहले से ही कर्ज के संकट में घिरे यूरोप और उसके बाद जापान, चीन और भारत में आर्थिक विकास की धीमी पड़ती रफ्तार, मंदी के अंदेशे को हवा देने के लिए काफी है।