चमत्कार

समाजवाद के 6 चमत्कार
 
1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
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भारत में वरिष्ठ पत्रकार और चीन पर कई पुस्तके लिखनेवाले प्रेमशंकर झा ने अपनी पुस्तक  -मैनेज्ड केओस:द फ्रजिलिटी आफ द चायनीज मिरेकल) – में चीन के चमत्कार के अतंर्विरोधों को स्पष्ट करते हुए कहते हैं- मसलन चीन एक ही समय विश्व का  सबसे ज्यादा autarchic  और सबसे ज्यादा वैश्विक स्तर पर इंटरकनेक्टेड अर्थव्यवस्था है। उसकी प्रति व्यक्ति आय पिछले तीस वर्षों में 11गुना बढ़ी है और उसने 40करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है लेकिन  यह तेजी से बढ़ते असंतोष को नहीं रोक पाया जो सरकार के खिलाफ संकल्पित विपक्ष के तौर पर अपने को प्रगट कर रहा है।चीन की विकास दर पिछले तीस

अमेरिका में कुछ वर्ष पहले एक और पुस्तक छपी है जिसका शीर्षक है –चायना : फ्रेजाइल सुपर पावर : हाउ चायनाज इंटरनल पालीटिक्स डीरेल इटस् पीसफुल राइज-अमेरिकी विदेश विभाग में आला अफसर रही सूसन  एल शिर्क की यह पुस्तक  इस मिथ को तोड़ती है कि चीन एक एसी महाशक्ति बन सकता है जो सारी दुनियां को चलाएगा।उनका निष्कर्ष यह है कि चीन एक उभरती महाशक्ति जरूर है मगर एक कमजोर महाशक्ति ।चीन  के अपने अंतर्विरोध एसे है जो उसके नेतृत्व की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकते हैं।ये हैं बूढ़ी होती आबादी,इंटरनेट का उदय,अर्थव्यवस्था का निजीकरण,शहरी अमीरो और ग्रामीण गरीबों के बीच की बढ़ती खाई,भ्