मतदान

समाजवाद के 6 चमत्कार

1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
3- पैसे सभी को मिलते हैं, लेकिन इस पैसे से खरीदने के लिए कुछ भी नहीं होता
4- कोई कुछ नहीं खरीद सकता, लेकिन सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है
5- सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है, लेकिन कोई संतुष्ट नहीं होता
6- कोई संतुष्ट नहीं होता, लेकिन 99% लोग सिस्टम के लिए मतदान करते हैं

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"यदि आप ऐसे राजनेताओं को वोट देते आ रहे हैं जो आपको मुफ्त (दूसरों के खर्च पर) चीजें देने का वादा करते हैं, तब जब वे आपके पैसे से स्वयं सहित दूसरों को चीजें बांटते हैं, आपके पास शिकायत करने का अधिकार नहीं रह जाता है"

- थॉमस सोवेल

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जुलाई में अपराधियों को विधायी सदनों में प्रवेश करने से प्रतिबंधित करने का निर्णय सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट ने असंवेदनशील राजनीतिक वर्ग को एक और तगड़ा झटका दिया है। इस बार उसने लंबे इंतजार के बाद मतदाताओं को एक ऐसा अधिकार दे दिया जिसकी मदद से वे राजनीतिक दलों की मनमानी का मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को चुनाव में उतरने वाले सभी प्रत्याशियों को खारिज करने का विकल्प देकर चुनाव सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस फैसले के बाद अब मतदाताओं को ‘इनमें से कोई नहीं’ बटन दबाने का विकल्प मिलेगा। अपने आदेश में शीर्ष अदाल

एक नेता मरने के बाद यमपुरी पहुँच गया वहां यमराज ने उसका भव्य स्वागत किया,यमराज ने कहा इससे पहले कि मैं आपको स्वर्ग या नरक भेजूं पहले मैंचाहता हूँ  कि आप दोनों जगहों का मुआयना कर लें कि आपके लिए कौन सी जगह ज्यादा अनुकूल होगी!

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जब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का झंडा अन्ना हजारे के हाथों से अरविंद केजरीवाल के पास आया तो इसमें एक नया जोश देखने को मिला। पिछले कुछ हफ्तों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के खुलासे सामने आए। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई सफल होती है या नहीं, लेकिन यह अपने पीछे एक बड़ी उपलब्धि छोड़ रही है। इसने मध्य वर्ग को जगा दिया है और शशि कुमार की कहानी इसे साबित करती है।

Author: 
गुरचरण दास