सड़क

सम्पूर्ण विश्व में शहरीकरण श्रम विभाजन की सहायता से समृद्धि बढ़ाता है। इसलिए भारत जैसे देशों में शहरीकरण को संपन्नता बढ़ाने के साधन के रूप में अपनाना सरकार के पिछले 50 वर्षों के प्रयासों (ग्रामीण विकास के नाम पर निर्रथक धन का व्यय) की अपेक्षा बेहतर विकल्प है। अभी हाल ही के आर्थर एंडरसन फार्च्यून के विश्वव्यापी सर्वे में भारत के शहरों को सबसे खस्ताहाल स्थिति में पाया गया। निश्चित ही संपन्न देश होने का यह तरीका नहीं है।

शिशु मृत्यु दर और अपेक्षित आयु के मामले में बिहार राष्ट्रीय औसत से पीछे ही रहा करता था, लेकिन अभी वह दोनों मामलों में इसके काफी करीब पहुंच गया है। 47 प्रति हजार के आंकड़े के साथ फिलहाल बिहार शिशु मृत्यु दर के मामले में भारतीय औसत (48 प्रति हजार) से थोड़ा बेहतर स्थिति में है, जबकि 65.6 वर्ष की अपेक्षित आयु के साथ वह करीब-करीब भारतीय औसत (66.1 वर्ष) की बराबरी पर है। कुल मृत्यु दर के मामले में 7.2 प्रति हजार के भारतीय औसत के मुकाबले बिहार 6.8 प्रति हजार के आंकड़े के साथ अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है। यह तथ्य बिहार में टीकाकरण की शानदार सफलता को व्यक्त करता है। कुछ अंधेरे पह

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

देशवासी हर नेता को भ्रष्ट मानते हैं। ऐसे में उदास होने की जरूरत नहीं है। हमें भ्रष्ट नेताओं में सही नीतियां बनाने वाले को समर्थन देना चाहिए। यदि घूस लेने वाले और गलत नीतियां बनाने वाले के बीच चयन करना हो तो मैं घूस लेने वाले को पसंद करूंगा। कारण यह कि घूस में लिया गया पैसा अर्थव्यवस्था में वापस प्रचलन में आ जाता है, लेकिन गलत नीतियों का प्रभाव दूरगामी और गहरा होता है। ऐसे में देश की आत्मा मरती है और देश अंदर से कमजोर हो जाता है। आम तौर पर माना जाता है कि भ्रष्टाचार का आर्थिक विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है। मसलन भ्रष्टाचार के चलते सड़क कमजोर बनाई जाती है, जिससे वह जल्दी टूट

सम्पूर्ण विश्व में शहरीकरण श्रम विभाजन की सहायता से समृद्धि बढ़ाता है। इसलिए भारत जैसे देशों में शहरीकरण को संपन्नता बढ़ाने के साधन के रूप में अपनाना सरकार के पिछले 50 वर्षों के प्रयासों (ग्रामीण विकास के नाम पर निर्रथक धन का व्यय) की अपेक्षा बेहतर विकल्प है। अभी हाल ही के आर्थर एंडरसन फार्च्यून के विश्वव्यापी सर्वे में भारत के शहरों को सबसे खस्ताहाल स्थिति में पाया गया। निश्चित ही संपन्न देश होने का यह तरीका नहीं है।