वैश्वीकरण

अब यह बात व्यापक तौर पर स्वीकार कर ली गई है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग-2) सरकार में हाल में सुधारों की जो हलचल देखने को मिली है इसके सिवा उसके पास चारा बाकी नहीं था। लेकिन आखिर वह खुद को इतनी विषम परिस्थितियों में क्यों महसूस कर रही थी? क्या संसद का पूरा सत्र बेकार चला जाना इसकी वजह था? मीडिया में लगातार आ रही नकारात्मक खबरें? भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान शहरी मध्य वर्ग का उससे दूर छिटकना? इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनावों में हार की आशंका?

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