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गरीबी को खत्म करने के अभी तक सुने गए प्रस्तावों में सबसे आसान एक एनजीओ में काम करने वाले एक दोस्त की ओर से आया। क्यों न हम न्यूनतम वेतन को इतना बढ़ा दें कि सभी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ जाएं? यह कितना आसान लगता है मनोहारी और दर्दरहित। अफसोस, यह नाकाम रहेगा क्योंकि हमारे यहां एक ऐसा कानून है जिसका परिणाम अनपेक्षित है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाने वाले दीपावली के त्यौहार को मनाने के मुख्यतः दो कारण हैं। पहला कारण, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण का संहार कर अयोध्या के राजा राम, भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ अपने राज्य वापस लौटे थे। पुष्पक विमान से रात के अंधेरे में अयोध्या पहुंचे राम के स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने घर के बाहर दिए जलाए और रौशनी कर विमान को यथास्थान उतरने की राह दिखाई। कालांतर में यह उस घटना को याद करने और खुशी मनाने की परंपरा के तौर पर प्रचलित हुआ। दूसरा कारण, धन, सुख और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर धनार्

भारत 2020-25 तक विश्व की दूसरी महाआर्थिक शक्ति बनने का अनुपम स्वप्न संजोए हुए है। इस दिशा में आर्थिक मंदी, महंगाई और वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद इसकी यात्रा आगे बढ़ रही है। देश में करोड़पति, अरबपति और खरबपतियों की आबादी भी बढ़ रही है। 20 से 25 करोड़ के तथाकथित 'ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास' के अस्तित्व में आने का दावा भी किया जा रहा है। अब भारत को अमीर राष्ट्रों के समूह (जी-8, जी-20 आदि) में शामिल होने का न्योता भी दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के हम प्रबल दावेदार बन चुके हैं। दो दशकों से वैश्वीकरण, निजीकरण, उदारीकरण और विनिवेशीकरण का अश्वमेध अबाध