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खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर बहस अंततः समाप्त हो गई। उम्मीद है कि अब इसने उन अन्य गरमागरम बहसों की आत्माओं के बीच अपनी शांतिपूर्ण जगह बना ली होगी, जिनसे हमारा लोकतांत्रिक देश यदा कदा गुजरता रहता है। हर समय लगता है मानो यह हमारे जीवन मरण का मुद्दा हो और हम विनाश के कगार पर खड़ें हों। अगर आप उनमें से हैं, जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के विरोधियों द्वारा की गई बर्बादी की भविष्यवाणियों से डरते हैं तो यहां प्रस्तुत है इसी तरह की पहले हुई कुछ बहसों का छोटा सा इतिहास। यह बताने के लिए कि लाखों भारतीय नौकरी से निकालकर फेंक नहीं दिए जाएंगे। और भारत वॉलमार्ट या टेस्को का उपनिवेश

खुदरा व्यवसाय देश में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा उद्योग है। यह खेती के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता क्षेत्र भी है। देश की जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत और रोजगार के अवसर प्रदान करने में 6-7 प्रतिशत हिस्सेदारी खुदरा व्यवसाय की है। लगभग डेढ करोड़ रिटेल आऊटलेट्स के साथ भारत विश्व में सबसे ज्यादा आऊटलेट्स घनत्व वाला देश है। चाहे असंगठित रूप से एक परिवार द्वारा छोटे स्तर पर किया जाने वाले खुदरा व्यवसाय के स्वरूप में हो अथवा संगठित रूप में पिछले दस वर्षों में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण विकास का साक्षी बना है। उदारवादी अर्थ व्यवस्था, प्रतिव्यक्ति आय और उपभोक्तावाद में वृद्धि ने बड