पेड़

- वन कानून में बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका

- याचिका में ट्रांजिट पास परमिट व्यवस्था खत्म करने की भी लगाई गई है गुहार

...जोनाथन को पैदल चलते कई घंटे हो चुके थे लेकिन दूर-दूर तक ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा था जिससे पता चल सके कि आसपास किसी तरह का जीवन भी है। अचानक पास की झाड़ी में कुछ हिलने की आहट हुई। पीली धारीदार पूंछवाला एक छोटा सा जानवर झाड़ियों के बीच मुश्किल से नजर आ रह रास्ते से नीचे की ओर भागा। शायद एक बिल्ली थी। जोनाथन ने सोचा, क्या पता यही मुझे किसी बस्ती तक पहुंचा दे। जोनाथन ने घनी झाड़ियों के बीच कूद लगा दी।

 

बच्चा पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा है; तुम क्या करोगे? तुम तत्काल डर जाओगे--हो सकता है कि वह गिर जाए, हो सकता है वह अपना पैर तोड़ ले, या कुछ गलत हो जाए। और तुम्हारे भय से तुम भागते हो और बच्चे को रोक लेते हो। यदि तुमने जाना होता कि पेड़ पर चढ़ने में कितना आनंद आता है, तुमने बच्चे की मदद की होती ताकि बच्चा पेड़ पर चढ़ना सीख जाता! और यदि तुम डरते नहीं हो तो उसकी मदद करो, जाओ और उसे सिखाओ। तुम भी उसके साथ चढ़ो!

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चीनी वस्तुओं के किसी भी बाजार में छाए रहने का मुख्य कारण उनका तुलनात्मक रूप से सस्ता होना होता है। लेकिन यदि देसी वस्तु के सस्ते होने के बावजूद उसी चीनी वस्तु की भारी मात्रा आयात की जाए और यहां के उत्पादकों की अनदेखी की जाए तो इसे नीति निर्धारकों की अदूरदर्शिता  नहीं तो और क्या कहेंगे।

बीते रविवार को हम सब ने धूमधाम से लोहड़ी जलाई। इसी तरह होली के भी पहले लोग होलिका दहन करते हैं। आज के ग्लोबल वॉर्मिंग के दौर में त्योहारों के नाम पर क्या ऐसे रिवाज उचित हैं?

बांस के पेड़ की बजाए घास होने के तथ्य के वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित और संवैधानिक तौर पर स्वीकृत हो जाने के बावजूद नौकरशाही और पहले से जारी व्यवस्था के कारण अब तक इसे घास के रूप वैधानिक मान्यता नहीं मिल सकी है। जिसके कारण इसकी कटाई और व्यवसायिक प्रयोग की मनाही है। यदि इसे घास के रूप में पर्यावरण और वन मंत्रालय से वैधानिक मान्यता मिल जाती है तो देश में न केवल हरे वृक्षों की कटाई में कमी आएगी बल्कि इसके सहारे आजिविका कमाने वाले लाखों आदिवासियों व जंगल पर निर्भर जनजातियों को व्यवसाय भी उपलब्ध हो सकेगा। यहां तक कि स्वयं योजना आयोग का भी मानना है कि इससे 5 करोड़ लोगों के रोजगार