अमेरिका

- शिक्षा, सुरक्षा और असंगत कर प्रणाली के कारण ब्रिटेन सहित अन्य देशों में पलायन करने को मजबूर हो रहे लोग
 
- प्रतिदिन 12 लोग छोड़ रहे हैं देश, सबसे ज्यादा पलायन वाले देशों में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान
 

कल अर्थात 2 फरवरी को आयन रैंड का 110वां जन्मदिवस था। 2 फरवरी, 1905 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में जन्मी आयन रैंड ने छह वर्ष की उम्र में खुद ही पढ़ना लिखना सीख लिया था। दो साल बाद उन्हें बच्चों की एक फ्रांसीसी मैगजीन में अपना पहला काल्पनिक (फिक्शनल) हीरो मिल गया। हीरो की एक ऐसी छवि जो ताउम्र उनके दिलो-दिमाग पर चस्पां रही। नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने कल्पना आधारित लेखन को ही अपना कैरियर बनाने का फैसला कर लिया। रूसी संस्कृति के रहस्यवाद और समूहवाद की मुखर विरोधी आयन खुद को यूरोपियन लेखकों की तरह मानती थीं, खासतौर पर अपने सबसे पसंदीदा लेखक विटर ह्यूगो से सामना होने के बाद।

आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन ने सनसनी-सी फैला दी है। इसके चलते कई समीक्षक अपनी भविष्यवाणियों का फिर से मूल्यांकन कर रहे हैं। इसने राजनेताओं को भी अंततः बदलती स्थिति की ओर ध्यान देने पर मजबूर कर दिया है। यहां दो प्रश्न उठते हैं- क्या यह सिर्फ एक बार होने वाली घटनाओं में से है या फिर एक नई राजनीति की शुरुआत है? और देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर ग्रामीण भारत में ऐसी राजनीति का भविष्य क्या है?

पिछले तीन वर्षों से हमारी अर्थव्यवस्था संकट में है। विकास दर लगातार गिर रही है, महंगाई बढ़ती जा रही है और रुपया टूट रहा है। इन सभी समस्याओं की जड़ में कुशासन ही दिखाई देता है। महंगाई बढ़ने का कारण है सरकार द्वारा अपने राजस्व का लीकेज किया जाना। जैसे सरकार का राजस्व एक करोड़ रुपया हो और उसमें 20 लाख रुपये का रिसाव करके अफसरों और नेताओं ने सोना खरीद लिया हो। अब सरकार के पास वेतन आदि देने के लिए रकम नहीं बची। ये खर्चे पूरे करने के लिए सरकार ने बाजार से कर्ज लिए।

 

 

मिल्टन फ्रीडमैन ने अमेरिका, यूरोप, चीन और सोवियत रूस में निजीकरण की प्रवृत्ति की छानबीन की और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आर्थिक स्वतंत्रता का कोई एक तय मार्ग नहीं होता है और इस दौरान सांस्कृतिक भिन्नताओं का भी ध्यान रखना आवश्यक है।  

हाल ही में वित्तमंत्री पी. चिदंबरम थकाऊ विदेश दौरे से वापस लौटे हैं, जहां उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्वीर पेश करते हुए मौजूदा और संभावित निवेशकों को भारत के प्रति लुभाते हुए कहा कि भारत व्यापार के लिए आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने रेटिंग एजेंसियों को भी लुभाने का प्रयास किया कि कहीं वे भारत की रेटिंग न गिरा दें। वह अपने मकसद में कितने कामयाब हुए यह तो आने वाले महीनों में ही पता चलेगा जब उनके मंत्रालय को अगले आम चुनाव की तैयारियों के तहत लोकप्रिय राजनीति का बोझ उठाना पड़ेगा।

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