रिजर्वेशन

अब ट्रेन आनंद विहार से मुगलसराय के लिए चल पड़ी। थोड़ी ही देर में वर्दीधारी अटेडेंट चेहरे पर मुस्कान और हाथ में बेडिंग लिए हमारे समक्ष फिर अवतरित हुआ। ‘योर बेडिंग्स सर’ के साथ उसने साफ सुथरे बेडशीट, पिलो और टावेल हम सभी की सीटों पर रख दिए। जबकि आमतौर पर ट्रेन यात्रा में कोच अटेंडेंट्स से टॉवेल लेने के लिए खासी बहस करने की जरूरत पड़ती है। भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली में यह सुखद परिवर्तन मेरे अंदर के पत्रकार को इन सबके बारे में जानने के लिए उत्सुक करने लगा। सहयात्रियों के साथ बातचीत के बाद यूं ही हाथ-पैर सीधा करने के उद्देश्य से मैं गेट तक और फिल ‘लघुशंका’ महसूस न

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केंद्र सरकार द्वारा वंचित व कमजोर वर्ग को गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित कराने के लिए लागू किया गया शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून स्वयं ही सर्वशिक्षा अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित होता प्रतीत हो रहा है। कानून में समाहित कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिनसे देशभर के लाखों निजी (बजट) प्राइवेट स्कूल बंद होने की कगार पर पहूंच गए हैं। अकेले दिल्ली में ही 13 हजार से ज्यादा स्कूलों पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों नौनिहालों का भविष्य भी अंधकारमय हो गया है। दुष्परिणामों से भरे आरटीई के इन्हीं प्रावधानों के खिलाफ आवाज उठाने के उद्देश्

सरकारी नौकरियों के लिए प्रोन्नति में आरक्षण संबंधी विधेयक को लेकर पिछले दिनों राज्यसभा में जो कुछ हुआ, वह तो शर्मनाक है ही, इस संबंध में सरकार एवं प्रमुख दलों का रवैया उससे भी अधिक शर्मनाक है। समाजवादी पार्टी इसे साफ तौर पर सामाजिक न्याय के विरुद्ध मानती है। बसपा सुप्रीमो मायावती इसके लिए भाजपा से भी मदद की गुहार लगा चुकी हैं और बाद में इसे पारित न करा पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को समान रूप से जिम्मेदार भी ठहरा चुकी हैं। जाहिर है, वह इस विधेयक के पेश किए जाने को भी अपनी उपलब्धियों में गिनती हैं और आने वाले चुनावों में भुनाने की कोशिश भी करेंगी। भाजपा कई