राजीव गांधी

 

इतने दूर हो गए हैं हमारे राजनेता देश के यथार्थ से कि ऐसा लगता है, उनका भारत कोई और है और हमारा कोई और। उनका भारत अब सीमित है दिल्ली शहर के लुटियंस के इलाके की सीमाओं तक। जब हमारे भारत के दर्शन करने निकलते हैं नेताजी, तब या तो हेलीकॉप्टर में आते हैं या बड़ी-बड़ी विदेशी गाड़ियों के काफिले में सवार होकर। अपने भारत के किसी गांव में जब पहुंचते हैं नेताजी महाराज, तो चमचों से फौरन घिर जाते हैं, जो उनको यथार्थ की झलक तक नहीं देखने देते।

अप्रैल 2012 से देश में लागू हो चुकी बारहवीं पंचवर्षीय योजना में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निजी सरकारी साझेदारी के तहत सुधार की संभावनाएं तलाशने की योजना को कम्प्यूटरीकरण के बाद स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े क्रांतिकारी पहल के तौर पर देखा जाना चाहिए। इससे न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधारात्मक प्रयासों को बल मिलेगा बल्कि देश की मेधा को वांछित स्वरूप भी प्राप्त होगा। देखा जाए तो आजादी के बाद देश ने रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में तो काफी विकास किया लेकिन स्वास्थ्य व शिक्षा के मामले यह फिसड्डी ही रहा। रक्षा के क्षेत्र में विकास तो भारी भरकम बजट