milton friedman

"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप टमाटर की कमी पैदा करना चाहते हैं तो सिर्फ एक ऐसा कानून बना दीजिए जिसके तहत कोई भी खुदरा व्यापारी टमाटर की कीमत 20 रूपए प्रति किलो की दर से अधिक नहीं वसूल सकेगा। तत्काल ही टमाटर की कमी पैदा हो जाएगा। ठीक ऐसी ही स्थिति तेल और गैस के साथ है।"
- मिल्टन फ्रीडमैन

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नोबेल पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने सन् 1980 में लिखी अपनी पुस्तक 'फ्री टू चूज़' में धन खर्च किए जाने की प्रक्रिया को अध्ययन की सरलता के लिए चार हिस्सों में वर्गीकृत किया था। पहला, आप अपना धन स्वयं पर खर्च करते हैं। दूसरा, आप अपना धन किसी और पर खर्च करते हैं, तीसरा आप किसी और का धन स्वयं पर खर्च करते हैं और चौथा, आप किसी और का धन किसी और पर खर्च करते हैं। उदाहरणों के माध्यम से फ्रीडमैन ने स्पष्ट किया था कि धन खर्च करने का पहला तरीका सबसे ज्यादा किफायती और सर्वाधिक उपयोगिता प्रदान करने वाला होता है। धन खर्च क

जन्मदिन विशेषः "सही लोगों का चयन करना अच्छी बात है, लेकिन समस्याओं का समाधान इतने से ही नहीं होता। समस्याओं का समाधान गलत व्यक्ति के लिए सही कार्य करने को राजनैतिक ढंग से लाभकारी बनाने से होता है..: मिल्टन फ्रीडमैन"

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सरकार के तीन प्राथमिक कार्य होते हैं-
 
पहला, देश के लिए सैन्य सुरक्षा उपलब्ध कराना।
 
दूसरा, लोगों के बीच हुए अनुबंधों को पूरा कराना।
 
कोई और, किसी और के धन को उतना ध्यानपूर्वक खर्च नहीं करता जितना कि 'वह' स्वयं। कोई और, किसी और के संसाधनों को उतना ध्यानपूर्वक प्रयोग नहीं करता जितना कि 'वह' स्वयं। अतः यदि आप 'दक्षता' और 'कारगर तरीके' की उम्मीद करते हैं, और यदि आप चाहते हैं कि ज्ञान का सदुपयोग हो, तो आपको संपत्ति के निजी तरीके को अपनाना ही होगा.. 
 
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दुनिया में अल्पकालीन सरकारी कार्यक्रमों जितनी स्थायी चीज कुछ और नहीं हो सकती...
- मिल्टन फ्रीडमैन
 
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हाल के वर्षों के दौरान उपभोक्ता हित की वकालत वास्तव में तेजी से बढ़ते उद्योग जैसी रही है। इस देश में बेशक इसे राल्फ नादेर ने शुरू किया, पर इस उद्योग के विकास में उन्होंने वही भूमिका निभाई थी, जो हेनरी फोर्ड वाहन उद्योग की विकास प्रक्रिया में बहुत पहले ही निभा चुके थे- वह भी उपभोक्ता को ज्यादा लाभ पहुंचाते हुए, ऐसा मैं कह सकता हूं। पर जब से राल्