जनसंख्या

जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2mD5QI9 बाद में एक बार http://azadi.me/population_boon_not_bane इसे भी पढ़ना चाहिए...
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जब हम जैसे लोग यह कहते हैं कि - जनसंख्या समष्द्धि का कारण है, केवल मनुष्य ही ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है और नक्शे पर  अंकित प्रत्येक बिन्दु,  जनसंख्या की दृष्टि से सघन है और ज्यादा सम्पन्न है,  तो उनके जैसे (तथाकथित समाजवादी) लोग प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं तथा यदि ज्यादा लोग होंगे, तो ये जल्दी समाप्त हो जायेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी की समस्या का जूलियन साइमन ने गहनतापूर्वक अध्ययन किया। उसने दीर्घकालिक मूल्य सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया और इससे बड़े रो

किसी कॉलम में ऐसे विचार लिखना आसान नहीं है जो लहर के खिलाफ हों खासतौर से उन अच्छे इरादे वाले लोगों के खिलाफ जिन्हें हमने खुद प्रोत्साहित किया है। मुझे ऐसी ही दुविधा का सामना करना पड़ा जब मैंने आप और उनके संभलकर चलने की जरूरत के बारे में लिखा। आम आदमी पार्टी इन दिनों सबकी पसंद है। मीडिया उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है। गरीब उसे अपना मसीहा मानते हैं। बोर हो चुके अमीर एक्जीक्यूटिव अपनी नौकरी छोड़कर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा आप को बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनने और लोकसभा चुनाव जीतने की चर्चा है।

जब ऐसा कहा गया है कि मानव (Home Economicus) धन पैदा करने के लिए तैयार किया गया एक यंत्र है, तो भारतीय अर्थशास्त्र में बताए जा रहे उस तर्क की जांच करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जिसके अनुसार भारत की विशाल जनसंख्या गरीबी का एक कारण है। यदि मनुष्य एक मात्र ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है, तो इसकी अधिक संख्या गरीबी का कारण कैसे हो सकती है? सच क्या है ?

 

जब ऐसा कहा गया है कि मानव (Home Economicus) धन पैदा करने के लिए तैयार किया गया एक यंत्र है, तो भारतीय अर्थशास्त्र में बताए जा रहे उस तर्क की जांच करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जिसके अनुसार भारत की विशाल जनसंख्या गरीबी का एक कारण है। यदि मनुष्य एक मात्र ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है, तो इसकी अधिक संख्या गरीबी का कारण कैसे हो सकती है? सच क्या है ?

सम्पूर्ण विश्व में शहरीकरण श्रम विभाजन की सहायता से समृद्धि बढ़ाता है। इसलिए भारत जैसे देशों में शहरीकरण को संपन्नता बढ़ाने के साधन के रूप में अपनाना सरकार के पिछले 50 वर्षों के प्रयासों (ग्रामीण विकास के नाम पर निर्रथक धन का व्यय) की अपेक्षा बेहतर विकल्प है। अभी हाल ही के आर्थर एंडरसन फार्च्यून के विश्वव्यापी सर्वे में भारत के शहरों को सबसे खस्ताहाल स्थिति में पाया गया। निश्चित ही संपन्न देश होने का यह तरीका नहीं है।

जब ऐसा कहा गया है कि मानव (Home Economicus) धन पैदा करने के लिए तैयार किया गया एक यंत्र है, तो भारतीय अर्थशास्त्र में बताए जा रहे उस तर्क की जांच करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जिसके अनुसार भारत की विशाल जनसंख्या गरीबी का एक कारण है। यदि मनुष्य एक मात्र ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है, तो इसकी अधिक संख्या गरीबी का कारण कैसे हो सकती है? सच क्या है?

शिशु मृत्यु दर और अपेक्षित आयु के मामले में बिहार राष्ट्रीय औसत से पीछे ही रहा करता था, लेकिन अभी वह दोनों मामलों में इसके काफी करीब पहुंच गया है। 47 प्रति हजार के आंकड़े के साथ फिलहाल बिहार शिशु मृत्यु दर के मामले में भारतीय औसत (48 प्रति हजार) से थोड़ा बेहतर स्थिति में है, जबकि 65.6 वर्ष की अपेक्षित आयु के साथ वह करीब-करीब भारतीय औसत (66.1 वर्ष) की बराबरी पर है। कुल मृत्यु दर के मामले में 7.2 प्रति हजार के भारतीय औसत के मुकाबले बिहार 6.8 प्रति हजार के आंकड़े के साथ अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है। यह तथ्य बिहार में टीकाकरण की शानदार सफलता को व्यक्त करता है। कुछ अंधेरे पह

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

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