राजा

प्राचीन काल में सुकीर्ति नामक एक प्रतापी राजा हुआ करता था। उसके राज्य का नाम था अनंतप्रस्थ जिसकी राजधानी थी सूर्यनगर। अनंतप्रस्थ के निवासी अपने राजा का बहुत ही आदर करते थे। आदर करते भी क्यों नहीं, राज्य के विकास और सबकी भलाई ही सुकीर्ति के जीवन का एकमात्र उद्देश्य जो था। सुकीर्ति अपने राज्य के निवासियों की भलाई के लिए दिन-रात, सुबह-शाम बिना रुके, बिना थके काम करता रहता था और अपने साथ अपने दरबारियों और मंत्रियों पर भी कड़ी निगरानी रखता था। देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए राजा ने सुकीर्ति ने राजधानी सूर्यनगर के बीचोबीच एक विशाल हाट का निर्

महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों का केवल व्यक्तिगत तौर पर ईमानदार होना पर्याप्त नहीं, यह एक बार फिर साबित हो रहा है रक्षामंत्री एके एंटनी की नाकामी से। वह चौतरफा नाकामियों से घिरे हैं। खराब बात यह है कि वह न तो रक्षा सामग्री की खरीद में घपले-घोटाले रोक पा रहे हैं और न ही सेनाओं के आधुनिकीकरण को गति दे पा रहे हैं। इससे भी खराब बात यह है कि उनके कार्यकाल में भारतीय सेनाएं दिन-प्रतिदिन दुर्बलता की ओर बढ़ती दिख रही हैं। न तो थल सेना की जरूरतें पूरी हो पा रही हैं, न वायु सेना की और न ही नौसेना की। जब उन पर सवाल उठते हैं तो उनके समर्थक-शुभचिंतक उनकी ईमानदारी का उल्लेख क

 

राजनीति, क्रिकेट सहित विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के लिए निंदा अभियान चलाने की बजाय ईमानदारी से प्रयास करने की जरूरत। हर मोड़ पर जरूरी सरकारी अनुमति की एवज में हमारे सभी दलों ने जब भी मौका मिला, आगे बढ़ने को आतुर उद्योग जगत की बांहें मरोड़ीं और अपने दलीय तथा निजी कोषों को भरने के लिए धन दुहा है।

एक महानगरी में भीड़ थी। रास्ते पर लाखों लोग खड़े थे जो आतुरतापूर्वक सम्राट के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। कुछ समय पश्चात सम्राट की सवारी आई। भीड़ के सभी लोग सम्राट के वस्त्रों की चर्चा करने लगे और मजा यह कि सम्राट बिल्कुल नंग्न था । उसके शरीर पर वस्त्र थे ही नहीं। केवल एक छोटे से बच्चे को ,जो अपने बाप के कंधों पर बैठकर गया था बड़ी हैरानी हुई। उसने अपने बाप से कहा कि लोग सम्राट के सुंदर वस्त्रों की चर्चा कर रहे हैं मुझे तो सम्राट नग्न दिखाई पड़ रहा है। उसके बाप ने उससे कहा –चुप नासमझ ,कोई सुन लेगा तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी और वह बच्चे को लेकर भीड़ से बाहर हो गया।