पीआरएस लेजिसलेटिव

पूंजीवाद, बाजारवाद और पूर्ण प्रतियोगिता की अवधारणा ही एक ऐसा सिद्धांत है जिसे अपनाकर कोई भी देश एक साथ सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक समस्याओं सहित सभी समस्याओं से न केवल निजात पा सकता है बल्कि तरक्की और विकास के मार्ग पर भी अग्रसर हो सकता है। देश की तंगहाल आर्थिक स्थिति से निराश जनता और बाजार ने नब्बे की दशक में ऐसे अप्रत्याशित विकास को प्राप्त कर इसकी अनुभूति भी कर चुकी है। लेकिन वर्तमान समय में इरादतन अथवा गैर इरादतन ढंग से बाजार से प्रतियोगिता की स्थिति बनाने की बजाए इसे और हतोत्साहित किया जा रहा है जिसका परिणाम महंगाई, मुद्रा स्फिति आदि जैसी समस्याओं के रूप में हमारे साम

Category: